नाशिक में ‘भारत बंद’ को मिला कम समर्थन

नाशिक. भारत बंद (Bharat Band) को लेकर शहर से मिलीजुली प्रतिक्रिया देखी गई। शहर में रिक्शा और दुकानें चल रही थीं। किसान यूनियनों ने नए कृषि कानून के विरोध में मंगलवार को देशव्यापी बंद का आह्वान किया। इस पृष्ठभूमि में नाशिक में बंद का समर्थन करने वालों की संख्या कम दिखाई दी। बंद का जिले के विभिन्न संगठनों ने समर्थन किया है, जिसमें व्यापारी भी शामिल हैं। नतीजतन, कई दुकानें बंद रहीं।

शहर के चौकों में रही कड़ी पुलिस सुरक्षा  

किसानों के आंदोलन के चलते शहर के चौकों में कड़ी पुलिस सुरक्षा तैनात की गई थी। आडगांव, मुंबई नाका, पंचवटी आदि जगहों पर कहीं कड़ा बंद रखा गया तो कई जग्हों पर दुकानें खुली दिखाई दी। सुबह से ही हाईवे पर जाम लग गया था। इस बीच, भारत बंद के दौरान मुंबई-आग्रा महामार्ग पर ट्रान्सपोर्ट भी बंद दिखाई दिया। रास्तों पर चलती गाड़ियां भी रुक गईं। पहले तो शहर में लोगों को लगा था कि जनता कर्फ्यू जैसा माहौल रहेगा, लेकिन सुबह 11 बजे से कुछ दुकानें खुलनी शुरू हो गई और धीरे-धीरे शहर के कई इलाकों में दुकानें खुलने लगीं।

शहर की उपज मंडी में कड़ा बंद देखा गया। यहां व्यापारियों ने किसानों के बंद को भरपूर प्रतिसाद देते हुए मंडी में नीलामी को बंद रखा। सिडकों और सातपुर के उद्योग क्षेत्र भी पूरी तरह से बंद रहे। बड़ी फैक्टरियों में कहीं काम चल रहा था तो छोटी कंपनियां बंद रखी गई थीं। शहर ओर जिले के ग्रामीण इलाकों में बस, रिक्शा और अन्य वाहनों के बंद होने के कारण बाहर से लोगों का आवागमन भी पूरी तरह से बंद रहा। 

यहां के नागरिकों ने कृषि कानून का विरोध करने के लिए भारत बंद में सहभागी होने के लिए महाविकास आघाड़ी की ओर से किए गए आंदोलन का पूरा समर्थन किया। शहर का मेन रोड का इलाका पूरी तरह से बंद रहा, वहीं नाशिकरोड पर कहीं-कहीं मंडियां और दुकानें खुली रही. नाशिक से नाशिकरोड जाने के लिए रिक्शा और वाहन भी शुरू रहे। शहर के मध्य इलाकों में होटलें और शराब की दुकानें खुली पाई गईं।

कुल मिलाकर शहर के अधिक्तर छोटे व्यापारियों ने बंद को प्रतिसाद ना देते हुए अपने व्यापार को खुला रखा। प्याज़ मंडी और अन्य सब्जियों की मंडियां बंद रहीं। शहर के विभिन्न सेवा भावी संस्थानों ने जिला अधिकारी कार्यालय पहुंच कर किसान विरोधी कानून के विरुद्ध ज्ञापन दिए। ज्ञापन देने वालों में शहर की महाविकास आघाडी की तीनों पार्टियों के कार्यकर्ता भी देखे गए। वहीं भाजपा की ओर से बंद को प्रतिसाद ना देने पर अन्य राजनीतिक कार्यकर्ता नाराज दिखाई दिए।

देवलाली कैंप में बंद बेअसर

देवलाली कैंप में बंद को पूर्ण प्रतिसाद नहीं मिला. सुबह 10:00 बजे नाशिक के सांसद हेमंत गोडसे की अगुवाई में ट्रैक्टर में एक  शांतिपूर्ण रैली निकाली गई, जो संसारी नाका से होते हुए शहर के विभिन्न हिस्सों से गुजरते हुए पूरे शहर का दौरा किया. रैली में जय किसान के नारे लगाए गए. साथ ही किसान विरोधी बिल को वापस लेने की मांग की गई.

लासलगांव मंडी में करोड़ों का नुकसान 

कृषि कानून के निषेध में महाविकास आघाड़ी की ओर से बंद के आह्वान को यहां के व्यावसायिकों ने 100 प्रश प्रतिसाद देकर पूरा शहर बंद रखा. वहीं लासलगांव की कृषि उपज मंडी समिति के साथ रिक्शा और बस सेवा बंद रही, जिससे यहां के सभी रास्ते सूने दिखाई दिए. शहर के व्यवसायिकों ने भारत बंद का पूरी तरह से समर्थन करते हुए बंद रखा. मंडी समिति का व्यवहार बंद होने से करोड़ों रुपयों का व्यापार का नुकसान हुआ.