dengue

    नाशिक. शहर में कोरोना महामारी का प्रकोप कम हो रहा है। ऐसे में स्वास्थ्य टीम और नाशिक वासियों के सामने चिकनगुनिया (Chikungunya) और डेंगू (Dengue) का संकट खड़ा हो गया है क्योंकि सातपुर (Satpur) के श्रमिक नगर और अंबड (Ambad) परिसर में चिकनगुनिया और डेंगू के मरीज सामने आए हैं। अंबड और सातपुर के श्रमिक नगर (Shramik Nagar) परिसर में बुखार के मरीज बढ़ रहे हैं। 

    नाशिक महानगरपालिका के स्वास्थ्य विभाग ने इन परिसर के नागरिकों के खून के नमूने लिए हैं। सबसे अधिक मरीज होने वाले परिसर से 68 नागरिकों के खून के नमूने लिए गए। सातपुर के श्रमिक नगर में चिकनगुनिया के 31 तो अंबड परिसर में 5 मरीज सामने आए हैं। पिछले साल शहर में चिकनगुनिया का एक भी मरीज सामने नहीं आया था। इस साल एका-एक मरीजों की संख्या बढ़ने से नागरिकों के साथ अधिकारियों में खलबली मच गई है। एक ओर कोरोना महामारी का प्रकोप कम हो रहा है तो दूसरी ओर चिकनगुनिया और डेंगू के मरीज सामने आ रहे हैं।

    दवा का छिड़काव कर रही महानगरपालिका

    पिछले साल शहर में डेंगू के कुल 65 मरीज सामने आने से खून के नमूने कम लिए गए थे। इस साल दो दिनों से मरीजों की संख्या बढ़ने से खून के नमूने लिए जा रहे हैं। सावधानी के रूप में किस जगह पर पानी जमा होता है उन्हें खोज कर दवा का छिड़काव किया जा रहा है। पंक्चर के दुकान के बाहर रखे गए टायर जब्त किए जा रहे हैं। साथ ही सार्वजनिक शौचालय और स्वच्छता गृह की साफ-सफाई पर ध्यान दिया जा रहा है। जगह-जगह पर मच्छरों की तादाद न बढ़े इसलिए दवाई का छिड़काव किया जा रहा है।

    लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं

    चिकनगुनिया का सबसे प्रमुख लक्षण बुखार होता है। चिकनगुनिया के लक्षण सामान्य बुखार के लक्षण से भिन्न होते हैं, क्योंकि चिकनगुनिया में बुखार के साथ जोड़ों का दर्द अधिक होता है। इसके अलावा मतली, सर दर्द और कमजोरी ऐसे लक्षण होते है। ज़िका वायरस और डेंगू के लक्षण में समानता होने से चिकनगुनिया का गलत निदान होने की संभावना होती है। गंभीर प्रकरण में न्यूरोलॉजिकल, रेटिनल और हृदय रोग में पेचिंदा स्थिति भी निर्माण हो सकती है इसलिए वृद्ध मरीजों के युवाओं की तुलना में ठीक होने का प्रतिशत बहुत कम होता है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत महानगरपालिका के स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करने की अपील महानगरपालिका द्वारा की गई है।

    चिकनगुनिया और डेंगू से बचने के लिए मकान के प्रवेश द्वार और खिड़कियों को जाली लगाएं। अपने मकान और परिसर में पानी जमा न हो इस ओर ध्यान दें। उपयोग में न आने वाले स्टोरेज कंटेनर, पुराने टायर निकाल दें। पानी जमा करने वाले कंटेनर ढक कर रखें। एसी ट्रे और फ्रीज ट्रे नियमित रूप से साफ करें।

    -डॉ. राजेंद्र त्र्यंबके, जीव विशेषज्ञ, नाशिक महानगरपालिका