भूमिगत नालियों का निर्माण, करोड़ों की धांधली का आरोप

  • जनता ने लगाई डीएम से गुहार

साक्री /धुलिया. सरकार की अमृत योजना के तहत धुलिया शहर में भूमिगत नालियों का काम शुरू है और इस योजना के कार्यान्वयन के लिए 150 करोड़ रुपये को मंजूरी मिली है. नालियों के काम के लिए दिए गए निर्देशों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं तथा हल्के दर्जे की निर्माण सामग्री उपयोग में लाई जा रही है. जिसकी निगरानी नहीं होने से मनमाने ढंग से निर्माण को अंजाम दिया जा रहा है. जो केवल ठेकेदार के हित के लिए किया जा रहा है उक्त योजना में हो रहे कामों में बड़े पैमाने पर धांधली होने की आशंका से नगरवासियों में असंतोष पसरा है. 

नगर के निवासी दीपक काकुस्ते और अन्य नगरवासियों ने इसी के मद्देनजर जिलाधिकारी संजय यादव को लिखित निवेदन से उक्त विषय से अवगत कराया है. साथ ही अगर कामों में सुधार नहीं होता है तो जनांदोलन की चेतावनी भी दी है.

जूनियर इंजीनियर ने किया निरीक्षण

अमृत योजना के तहत आदर्श नगर में भूमिगत नाली के चेंबर का निर्माण मजदूर कर रहे थे. काकुस्ते ने निर्माण कार्य की पूछताछ की, निर्माण की बनावट को देखते हुए उन्होंने वहां मौजूद ठेकेदार के आदमी को बताया कि चेंबर का निर्माण मानक के हिसाब से बहुत छोटा है और निर्माण सामग्री में तैयार कांक्रीट भी सही नहीं है. इस तरह पूछताछ करने पर ठेकेदार का आदमी झल्लाते हुए उल्टे  उन्हीं पर बरस पड़ा.उनसे कहा कि उक्त योजना का काम जीवन प्राधिकरण विभाग की निगरानी में हो रहा है. विभाग के जूनियर इंजीनियर धोत्रे को उक्त विषय से अवगत कराया और आग्रह किया गया कि वे निर्माण कार्य की जगह आकर  चल रहे निर्माण का आकलन करें. वे तुरंत मान गए. वहां पहुंचकर उन्होंने दीपक काकुस्ते की शिकायत को सही पाया, लेकिन चेंबर की गहराई को सही ठहराया जो गलत है. इंजीनियर धोत्रे ने ठेकेदार के मजदूरों को निर्माण में अच्छी सामग्री के प्रयोग के निर्देश भी दिए.

मानकों का नहीं किया जा रहा पालन

दीपक काकुस्ते ने बताया कि ‘भूमिगत नाली के निर्माण कार्य में मानकों का पालन नहीं किया जा रहा, चेंबर की गहराई संदेहपूर्ण है जिसका समर्थन किया जा रहा है. सीमेंट और पथरी का अनुपात भी सही नहीं है, पथरी नदारद है. ये काम चूंकि लंबे अरसे के लिए होना है, बहुत जल्द खराब होने का डर है. आगे चलकर स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म देगा.सरकारी पैसों का दुरुपयोग होगा, भ्रष्टाचार होगा वह अलग’.

सुधार नहीं करने पर होगा जनांदोलन

उक्त योजना पर 136 करोड़ रुपये खर्च की मंजूरी दी गई है, जो  बढ़े हुए अनुमान से 150 करोड़ रुपये की लागत की योजना बन चुकी है. ऐसे कामों में हुई धांधली भी ठेकेदारों के लाभ में तथा करोड़ों में होगी. जनहित में फायदेमंद होने के एवज में नुकसानदेह साबित होगा. दीपक काकुस्ते ने उक्त समस्या को लेकर डी एम को शिकायत पत्र दिया है, उक्त कामों में हो रही धांधली से भी अवगत कराया है. उन्होंने ने अपनी शिकायत में उक्त योजना के निर्माण पर निगरानी के लिए तीसरे पक्ष को नियुक्त करने का सुझाव दिया है. घटिया दर्जे के काम में हो रही धांधली को रोकने और दोषियों को हटाने की मांग की है. उनकी मांग की उपेक्षा करने पर उन्होंने जनांदोलन चलाने की चेतावनी भी दी है.