कोरोना ने तोड़ी छठ पूजा की परंपरा, घरों में पूजा-पाठ

  • 50 से 60 हजार जुटती थीं महिलाएं

नाशिक. नाशिक शहर स्थित गोदावरी नदी के तट पर हर साल हजारों उत्तर भारतीय महिलाएं छठ पूजा करती थीं. लेकिन यह परंपरा कोरोना के कारण खंडित हो गई. इस पूजा के लिए हर साल 50 से 60 हजार महिलाएं गोदावरी तट पर पहुंच कर अपनी कामना पूर्ति के लिए सूर्य उपासना और निर्जला व्रत करती हैं.

दिवाली के 6वें दिन उत्तर भारतीय मुख्यता बिहार और उत्तर प्रदेश की महिलाएं नदी तट या समुद्र तट पर इकट्ठा होकर यह पूजा करती हैं, जिसे छठ पूजा, उषा पूजा, छठी प्रकृति, माई की पूजा, छठ पर्व, डाला छठ, सूर्य षष्टी आदि कहते हैं. बिहार राज्य के साथ अन्य राज्यों में स्थलांतरित हुए उत्तर भारतीय यह पूजा हर साल बड़े उत्साह के साथ करते हैं.

सामूहिक कार्यक्रमों पर रोक

इस साल पूरे विश्व में कोरोना का संकट मंडरा रहा है. इसलिए सामूहिक कार्यक्रमों पर प्रतिबंध लगाए गए हैं. राज्य सरकार ने छठ पूजा एक साथ करने पर प्रतिबंध लगाए हैं. इसलिए इस साल उत्तर भारतीय महिलाएं यह उत्सव उपलब्ध होने वाली जगह पर मना रही हैं.

नाशिक में बिहार की संख्या अधिक

इस बारे में अधिक जानकारी देते हुए उत्तर भारतीय जनसमुदाय के समन्वयक उमापति ओझा ने कहा, नाशिक में सर्वाधिक लोकसंख्या बिहार के नागरिकों की है. उत्तर प्रदेश में भी यह पूजा की जाती है. परंतु नाशिक में उत्तर प्रदेश के नागरिकों की संख्या बिहार की तुलना में कम है. इसलिए बिहार के नागरिक इस बार घर में ही पूजा कर रहे हैं.