नाशिक रेलवे स्टेशन पर मजदूरों की भीड़, गांव जाने की कर रहे तैयारी

    नाशिकरोड. कोरोना का संक्रमण (Corona Infection) नियंत्रण से बाहर जाने के कारण राज्य में किसी भी समय संपूर्ण लॉकडाउन होने के डर से नाशिक शहर (Nashik City) के परप्रांतीय मजदूर रेल (Rail) से गांव (Village)जाने की तैयारी कर रहे हैं। परिणामस्वरूप नाशिकरोड रेलवे स्थानक (Nashik Road Railway Station) में मजदूरों (Laborers) के काफिले बढ़ने लगे हैं। स्पेशल गाड़ी छोड़ने की मांग की जा रही है। तथापि भुसावल विभाग के डीआरएम विवेककुमार गुप्ता ने राज्य सरकार के माध्यम से नई गाड़ी की मांग करने पर इस बारे में विचार करने की बात स्पष्ट की है। इस दौरान गुप्ता ने नागरिकों को भयभीत न होने, भीड़ से दूर रहने और बिना टिकट यात्रा न करने की अपील की। 

    नाशिक में मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल के हजारों मजदूर हैं, जो नाशिक शहर के सातपुर, अंबड सहित जिले कि विभिन्न एमआईडीसी के साथ होटल, निर्माण क्षेत्र में कार्यरत हैं। विगत लॉकडाउन में मजदूरों को बड़े पैमाने पर असुविधा का सामना करना पड़ा था। रेल बंद होने से लाखों मजदूर परिवार के साथ अपने गांव की ओर पैदल निकल पड़े थे, जिसे ध्यान में रखते हुए मजदूर परिवार के साथ रेल स्थानकों पर पहुंच रहे हैं। इससे रेल स्थानक पर भीड़ जमा हो रही है। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए रेल सुरक्षा बल के जवान और रेल पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है।

    समय पर सावधानी बरतने का प्रयास

    मूल रूप से बिहार निवासी और नाशिक में बतौर कुक के रूप में कार्य करने वाले संजीव प्रसाद ने बताया कि पत्नी और तीन बच्चे, भाई के परिवार को लेकर वह अपने गांव जा रहे हैं। भाई यहीं रहेगा। लॉकडाउन होने पर रहने और खाने की असुविधा को टालने के लिए वह सावधानी बरत रहे हैं। वहीं, निर्माण मजदूरों ने कहा कि वर्तमान में स्थिति ठीक है, उसे बिगड़ने से पूर्व ही परिवार के साथ गांव जाने का निर्णय किया है। वहां पर छोटा-बड़ा कारोबार कर गुजारा कर लेंगे। पश्चिम बंगाल निवासी अमित दास ने बताया कि विगत लॉकडाउन में मालिक ने रेल शुरू होने तक निवास और भोजन की व्यवस्था की। इसके बाद तो ठीक रहा, लेकिन अब मालिक ने उन्हें गांव जाने की सलाह दी है।

    सात दिनों में बढ़ी संख्या

    बार, होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन, नाशिक के अध्यक्ष संजय चव्हाण ने बताया कि हमारे कारोबार पर कई नियम लादे गए हैं। इसलिए कर्मी और कुक अपने गांव लौट रहे हैं। विगत सात दिनों में इस संख्या में काफी वृद्धि हुई है।

    परप्रांतीय मजदूरों की धड़कनें बढ़ीं, गांव जाने की बनाई मानसिकता

    इस बीच, कोरोना का बढ़ता प्रादुर्भाव, दूसरे लॉकडाउन का डर और त्र्यंबकेश्वर मंदिर कब खुलेगा? को लेकर अनिश्चितता के कारण उस पर निर्भर छोटे-बड़े परप्रांतीय कारोबारियों ने अपने गांव जाने की मानसिकता बना ली है। त्र्यंबकेश्वर में उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश के कई व्यापारी विगत 20 से 25 वर्षों से कारोबार कर रहे हैं। इसमें त्र्यंबकेश्वर में आइसक्रीम, कुल्फी, फलों का रस बिक्री करने वाले, होटल-भोजन गृह चालक, शादियों में भोजन का ठेका लेने वाले आदि सहित अनेक कारोबार में शामिल हैं। कई व्यापारियों के बच्चे स्थानीय मराठी स्कूलों में पढ़ रहे हैं। उनके कारोबार विगत एक वर्षों से ठप हैं। इस बीच तीन महीने तक अनलॉक में राहत मिली, लेकिन अब फिर से अंशत: लॉकडाउन, बढ़ते हुए मरीजों के कारण भविष्य में फिर से संपूर्ण लॉकडाउन होने के डर से परप्रांतीय कारोबारियों ने गांव वापस जाने की तैयारी शुरू कर दी है।

    दिन-ब-दिन बढ़ रहे कोरोना मृतकों के आंकड़े

    शहर में कोरोना मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई है। दिनभर में कोरोना के कारण कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो रही है। इससे त्र्यंबकेश्वर में भय का वातावरण है। इस बीच अब अप्रैल आखिर तक सरकारी आदेशों के अनुसार मंदिर बंद किए गए हैं। संपूर्ण लॉकडाउन कब होगा, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। इसलिए परप्रांतीय कारोबारियों के दिलों की धड़कनें तेज हो गई हैं।