Dongargaon Pajhar Lake

    येवला. तालाब में पानी होने के बावजूद खड़ी फसलें (Crops) पानी की कमी (Insufficiency of Water) के कारण सूख रही हैं। पालखेड सिंचाई विभाग से भी पानी छोड़ने की मांग की गई है, लेकिन विभाग पानी छोड़ने से बच रहा है, जिससे किसानों ने सोमवार से भूख हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है। अच्छी बारिश (Good Rain) के कारण डोंगरगांव पाझर झील में प्रचुर मात्रा में पानी है।

     क्षेत्र के किसानों के कुओं में पानी की कमी के कारण खेती शुरू करने में कठिनाई आती है। पिंपलखुटे, बुद्रुक और भुल्लेगांव में किसानों ने मांग की है कि उनकी फसलों को बचाने के लिए तालाब से पानी छोड़ा जाए। डोंगरगांव, भारम क्षेत्र में इस साल बारिश के कारण छोटी सिंचाई नहरें बह कर खाली हो गईं। सारा पानी डोंगरगांव तालाब में जमा हो गया है। 

    दुग्ध संघ ने दिया अधिकारियों को ज्ञापन

    क्षेत्र में कृषि और पशुधन के लिए पीने के पानी की कमी है। चूंकि झील में पर्याप्त पानी है, इसलिए किसानों ने इस पानी का लाभ पाने के लिए 9 फरवरी को पालखेड़ सिंचाई विभाग से अनुरोध किया था कि तालाब का पानी छोड़ा जाए। फार्म नंबर 7 भरने के बावजूद किसान पानी न मिलने से नाराज हैं। दैनिक जानकारी लेने के बावजूद अधिकारी इससे बच रहे हैं और पानी की कमी के कारण प्याज, गेहूं और अन्य फसलें सूख रही हैं। इस संबंध में एक ज्ञापन दुग्ध संघ की अध्यक्ष कल्पना कुरे ने विभाग के अधिकारियों को दिया है। ज्ञापन पर संघ के पूर्व अध्यक्ष शिवाजी पगारे, प्रमोद उंडे, चंद्रकांत आढाव, जगन पवार, रामभाऊ रोते और अन्य के हस्ताक्षर हैं।

    इस भरी हुई झील के रिसाव के कारण रिसाव वाले पानी के रास्तों की मरम्मत करके अवैध जल पंपिंग को रोका जाना चाहिए। किनारों का चौड़ीकरण किया जाना चाहिए। यदि क्षेत्र के किसानों को इस पानी का लाभ मिलता है, तो खड़ी फसलें बच जाएंगी। किसान बेचैनी से पानी छोड़े जाने का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि अगर पानी दिया जाता है तो 500 एकड़ भूमि की फसल बच जाएगी।

    -कल्पना कुरे, दुग्ध संघ अध्यक्ष