Balasaheb Thorat

    देवलाली कैम्प. नाशिक तहसील (Nashik Tehsil) के मौजे बेलतगांव, विहितगांव, मनोली देवस्थान (Devsthan) जमीन के मुद्दों पर राजस्व मंत्री बालासाहब थोरात (Balasaheb Thorat) ने मंदिर विश्वस्त, संबंधित किसान और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ चर्चा कर सभी का पक्ष सुना। इसके बाद इस मामले में उचित चर्चा करने की बात कही। 

    मुंबई में राजस्व मंत्री बालासाहब थोरात के दफ्तर में यह बैठक हुई। तहसील के मौजे बेलतगांव, विहितगांव, मनोली स्थित कृषि जमीन (Agricultural Land) के ऋण पुस्तिका पर देवस्थान का नाम दर्ज है। वर्ष 1973 के दौरान सरकार ने आदेश निकाल कर पूर्व जिलाधिकारी के निर्देशों के अनुसार देवस्थान का नाम ऋणपुस्तिका पर दर्ज किया था।

    किसानों ने सरकार से लगाई गुहार

    इस दौरान संबंधित ऋण पुस्तिका से संबंधित संस्थान का नाम कम करने, अन्य अधिकार के इनाम वर्ग-3 का पंजीकरण रद्द करने की मांग करते हुए तीनों गांव के किसानों ने सरकार के पास आवेदन किया है। इस पार्श्वभूमि पर राजस्व मंत्री थोरात के पास दोनों पक्षों के वकील, विश्वस्तों ने अपना पक्ष रखा। विधायक सरोज अहिरे ने किसानों की जमीन की ऋण पुस्तिका से नाम हटाने की मांग की। इस दौरान थोरात ने इस मामले में निर्णय करने का आश्वासन दिया। बैठक के दौरान सांसद हेमंत गोडसे, विधायक सरोज अहिरे, पूर्व विधायक योगेश घोलप, जिलाधिकारी सूरज मांढरे, तहसीलदार अनिल दौंडे, व्यापारी बैंक के चेयरमैन निवृत्ति अरिंगले, सोमनाथ बोराडे, ज्ञानेश्वर गायकवाड़ सहित किसान उपस्थित थे।

    क्या है मामला

    श्री वेंकटेश बालाजी मंदिर देवस्थान, सप्तशृंगी देवस्थान व अनेक पीर देवस्थानों को पूर्व शासक पेशवा, निजाम आदियों ने गांव इनाम दिए। इसके बाद ब्रिटिश काल में इनाम कमिशन नियुक्त कर देवस्थान जमीन की जांच की गई। इस दौरान यह गांव देवस्थान को कमिशन दिए जाने की बात स्पष्ट हुई। इसके बाद चैरिटी कमिशन ने भी यह गांव देवस्थानों को इनाम देने पर मुहर लगाई। वर्ष 1972 में नाशिक के जिलाधिकारी ने परिपत्रक निकालकर जमीनों की ऋणपुस्तिका पर देवस्थानों के नामों का पंजीकरण किराया।

    जमीन की ऋण पुस्तिका पर दर्ज देवस्थानों के नाम हटाने की मांग किसान कर रहे रहे हैं। किसानों का मानना है कि देवस्थानों ने सॉईल ग्रण्ट व रेवेनू ग्रंट का अंतर समझना जरूरी है। कुल जमीन में से 10 प्रतिशत जमीन देवस्थानों का खर्च चलाने के लिए दी गई है। इसलिए संपूर्ण जमीन पर दावा करना गलत है।

    -सरोज अहिरे, विधायक, देवलाली चुनाव क्षेत्र

    संबंधित गांव की जमीन देवस्थान को देने की बात ब्रिटिश इनाम कमिशन, चैरिटी कमिशन की जांच में स्पष्ट हुई है। इसके अनुसार वर्ष 1972 में पूर्व जिलाधिकारी ने जमीन की ऋणपुस्तिका पर देवस्थानों के नामों का पंजीकरण किया। विगत 50 वर्षों में इस पर किसी ने भी आपत्ति दर्ज नहीं कराई है।

    -एड. हर्षवर्धन बालाजीवाले, सचिव, श्री वेंकटेश बालाजी संस्थान ट्रस्ट