Discontinued work of doctors, plight of patients

    शिर्डी. साईंबाबा अस्पताल (Saibaba Hospital) के डॉक्टरों (Doctors) ने पिछले साल बंद किए गए प्रोत्साहन भत्ते को बहाल करने की मांग को लेकर हड़ताल (Strike) शुरू कर दी है। इस हड़ताल के कारण अस्पताल (Hospital) में भर्ती मरीजों (Admitted Patients) की हालत खराब हो रही है। डॉक्टरों ने अपनी विभिन्न मांगों (Various Demands) को लेकर हड़ताल शुरू कर दी है और संस्थान प्रशासन ने इस ओर से आंखें मूंद ली हैं। 

    गंभीर रूप से बीमार लोगों को असुविधा से बचाने के लिए उनका उपचार किया जा रहा है। डॉक्टरों ने ऐसे मरीजों की जांच करने के लिए तैयारी दिखाई है। 25 से अधिक स्पेशलिस्ट डॉक्टरों ने इस आंदोलन में भाग लिया। कोविड की पृष्ठभूमि में पिछले 11 महीनों से डॉक्टरों का प्रोत्साहन भत्ता बंद कर दिया गया है। साईं मंदिर के दोबारा खुलने पर डॉक्टरों को आश्वासन दिया गया था कि यह भत्ता फिर से शुरू किया जाएगा। मंदिर को खोले हुए 4 महीने हो चुके हैं, लेकिन भत्ते पर कोई फैसला नहीं हुआ है।

    डॉक्टरों का वेतन कम हो गया था

    भत्ता शुरू करने के बारे में निर्णय संस्थान के रुके हुए फैसलों के बीच फंस गया था। कोरोना अवधि के दौरान, डॉक्टरों के वेतन में हर जगह वृद्धि हुई थी। संस्थान और कोविड केंद्र में दिन-रात काम करने के बावजूद, इन डॉक्टरों का वेतन कम हो गया था और असंतुष्ट डॉक्टरों ने आखिरकार काम रोकने का फैसला किया। साईं संस्थान के वरिष्ठ अधिकारी डॉ. आकाश किसवे और डॉ. मैथिली पितांबरे ने संबंधित डॉक्टरों से मुलाकात की और चर्चा की। इस बार मार्ग निकालने की बजाए डॉक्टरों का गुस्सा उमड़ पड़ा है। संस्थान द्वारा कोई ठोस निर्णय ना लिए जाने से हड़ताल जारी रखी गई। ऐसे में अस्पताल में अपने वाले मरीजों की हालत खराब हो गई।

     ऑपरेशन भी रोक दिए गए

    ऑपरेशन भी रोक दिए गए। डॉक्टरों की अचानक हड़ताल से जिले के साथ-साथ अन्य जिलों के भी मरीजों को काफी परेशानी हुई, जो यहां उपचार के लिए आते हैं। ओपीडी बंद होने के कारण मरीज और उनके रिश्तेदार पूरे दिन अस्पताल के सामने बैठे रहे। कई मरीजों का ऑपरेशन भी टाल दिया गया। परिणामस्वरूप मरीजों ने डॉक्टरों और संस्थान के प्रशासन पर अपनी नाराजगी व्यक्त की।