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    नाशिक. जनजातीय विकास निगम, नंदुरबार (Nandurbar) के एक सेवानिवृत्त कर्मचारी (Retired Employees) सत्तारसिंह वसावे का जाति प्रमाण-पत्र अनुसूचित जनजाति प्रमाण-पत्र निरीक्षण समिति द्वारा रद्द (Canceled) कर दिया गया है। यह व्यक्ति मूल रूप से गुजरात (Gujarat) का है, उसने खुद को महाराष्ट्र (Maharashtra) का निवासी बताकर फर्जी प्रमाण-पत्र (Fake Certificate) बनाकर राज्य सरकार को धोखा दिया है। इससे पहले निगम की एक जांच से पता चला था कि इस व्यक्ति का एमएस-सीआईटी (MS-CIT) प्रमाण-पत्र भी फर्जी (Fake) था। 

    अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या निगम अन्य कर्मचारियों के भी जाति प्रमाण-पत्रों की जांच करेगा? यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि क्या जीवन भर के लिए की गई सरकारी सेवाओं का वेतन और साथ ही सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाला सरकारी लाभ भी उस कर्मचारी से वसूला जाएगा। आरक्षित वर्ग से सरकारी सेवा में शामिल होने के दौरान संबंधित व्यक्ति की नौकरी जाति प्रमाण- पत्र और साथ ही जाति वैधता समिति द्वारा मिले वैधता प्रमाण-पत्र पर निर्भर होती है। अन्यथा इसे आरक्षित श्रेणी में नहीं माना जाता है। इसके अलावा, संबंधित व्यक्ति को राज्य की सेवा में प्रवेश करते समय राज्य का मूल निवासी होना जरूरी है। इस बीच, गुजरात के मूल निवासी सत्तारसिंह वसावे नंदुरबार जिले में जनजातीय विकास निगम के कार्यालय में शामिल हो गया। उसने जाति प्रमाण-पत्र के साथ वैधता प्रमाण-पत्र भी दिया था। उल्लेखनीय है कि वह महाराष्ट्र से नहीं होते हुए भी राज्य की सेवा में प्रवेश किया और मोटी तनख्वाह भी उठाई।

    क्या सेवानिवृत्ति राशि भी वसूल करेगी सरकार?

    संबंधित व्यक्ति ने समय-समय पर वेतन वृद्धि योजना का भी लाभ लिया है। अब जब उसके प्रमाण-पत्र को निरस्त कर दिया गया है, तो निगम के निर्णय ने इस ओर ध्यान आकर्षित किया है कि क्या सरकार से लिए गए वेतन सहित अन्य वित्तीय लाभ भी उससे वापस ली जाएगी है। क्या संबंधित व्यक्ति से 11 लाख 42 हजार 805 सेवानिवृत्ति वेतन वसूल किया जाएगा?

    वैधता समिति का आदेश

    संबंधित व्यक्ति भील जनजाति का है। जैसा कि वह गुजरात से है, उसे गुजरात से प्रमाण-पत्र लेना चाहिए था। इसके अलावा गुजरात के प्रमाण-पत्र पर वह महाराष्ट्र में नहीं, बल्कि अपने गृह राज्य में लाभ प्राप्त करने के लिए पात्र होगा। 9 फरवरी, 2021 की वैधता समिति के आदेश में यह स्पष्ट किया गया है।