टीपी स्कीम को लेकर किसानों का हल्लाबोल

  • उपमहापौर के विरोध से भारतीय जनता पार्टी में हुआ दो फाड़
  • किसानों की आक्रामकता से महापौर पिछले दरवाजे से पहुंचे मनपा कार्यालय

नाशिक. टीपी स्कीम को पूरा करने के लिए मनपा में सत्ताधारी भाजपा ने अपनी पूरी शक्ति लगाई. ऐसे में भाजपा की उपमहापौर भिकूबाई बागुल के टीपी स्कीम प्रस्ताव का विरोध करने से भाजपा में दो फाड़ हो गया. उपमहापौर बागुल की सूचना को महापौर द्वारा नजरअंदाज करने के बाद बागुल ने महापौर सतीश कुलकर्णी के कक्ष में प्रवेश कर किसानों के फायदे के लिए 60-40 फार्मूला की योजना में बदलाव करने की सूचना दी.

संभाजी मोरुस्कर ने भी किसानों के साथ चर्चा कर निर्णय लेने की मांग की. टीपी स्कीम परिसर के सभी नगरसेवकों की यही मांग होने से महापौर की समस्या बढ़ गई है. महापौर कुलकर्णी ने उप सूचना को दाखिल किया. परंतु तकनीकी समस्या के चलते उप सूचना मंजूर होने की संभावना कम है. सभागृह नेता सतीश सोनवणे ने कहा कि सरकारी नियमों के तहत योजना रद्द नहीं की जा सकती. भाजपा गटनेता जगदीश पाटिल ने कहा कि कितने किसानों का इस योजना के लिए विरोध है? इस बारे में विस्तृत जानकारी देने की मांग करते ही महापौर कुलकर्णी ने प्रस्ताव को अनुमति दे दी.

कुल मिलाकर टीपी स्कीम को लेकर भाजपा में विवाद शुरू हो गया है. स्मार्ट सिटी अभियान के हरित क्षेत्र विकास अंतर्गत मखमलाबाद व हनुमानवाड़ी परिसर के 304 हेक्टेयर क्षेत्र में नगररचना परियोजना अर्थात टीपी स्कीम का अंतिम उद्देश्य घोषणा प्रसिद्ध न करते हुए योजना का प्रस्ताव रद्द करने की मांग को लेकर किसानों ने महापौर निवास स्थान रामायण बंगले के साथ मनपा के मुख्यालय के बाहर एक घंटा धरना आंदोलन किया.

परियोजना का प्रस्ताव रद्द करने किसानों ने दिया धरना

इस योजना का तीव्र विरोध करते हुए किसानों ने महासभा में प्रवेश करने का प्रयास कर भाजपा सरकार का विरोध करते हुए हुकुमशाही बंद करने को लेकर नारेबाजी की. परंतु ऑनलाइन महासभा के लिए महापौर के जाने से उनकी भेंट न होने से किसानों ने इस निर्णय के खिलाफ उच्च न्यायालय में जाने का निर्णय लिया. किसानों का विरोध होने के बाद भी सत्ताधारी भाजपा द्वारा इस योजना को जबरन लादने से किसान संतप्त हुए हैं.

ऐसे में पुणे स्थित नगररचना संचालकों ने 350 से अधिक एकड़ क्षेत्र के किसानों का विरोध ध्यान में रखते हुए उनके साथ चर्चा करने के बाद ही प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए. लेकिन ऐसा न करते हुए महासभा का आयोजन कर योजना को बढ़ावा देने का प्रयास करने से ही किसान आक्रामक हुए. यह योजना नामंजूर करने की मांग किसानों ने की. -नारेबाजी करते हुए महासभा में घुसने का किया प्रयास

इस दौरान किसानों ने नारेबाजी करते हुए महासभा में घुसने का प्रयास किया. परंतु पुलिस ने किसानों को मनपा के प्रवेश द्वार पर ही रोक लिया. इससे कुछ देर के लिए तनाव पैदा हो गया. किसानों ने अपनी मांगों का ज्ञापन दिया. आंदोलनकारी महापौर से रामायण पर मिलना चाहते थे, लेकिन महापौर ने किसानों की आक्रामकता को देखते हुए सीधे महासभा में पहुंचने का निर्णय लिया. इसके चलते किसान मनपा के प्रवेश द्वार पर महापौर की गाड़ी रोकने के लिए पहुंचे. इस बारे में महापौर को भनक लगते ही वह पिछले दरवाजे से मुख्यालय में प्रवेश किए.