गड्ढों में तब्दील हुईं मनमाड़ की सड़कें

जान जोखिम में डाल वाहन चला रहे चालक

सड़कों की मरम्मत में गड़बड़ी का आरोप

कुछ मार्गों का हाल ही में हुआ था काम

मनमाड़. इस समय शहर से लेकर गांव तक, छोटी सड़कों से लेकर महामार्गों तक सभी सड़कों पर बारिश के कारण उत्पन्न गड्डों का मुद्दा गरमाया हुआ है. मनमाड़ शहर की सड़कें भी गड्ढों से अछूती नहीं हैं. हलकी सी बारिश होने के बाद शहर की लगभग सभी सड़कों पर जगह-जगह इतने गड्ढे हो गए हैं कि वाहन चलाना और लोगों को पैदल चलना कठिन हो गया है.जिन सड़कों पर गड्ढे पड़े हैं, उनमें से कुछ सड़कों का निर्माण कार्य हाल ही में किया गया है. इतने कम समय में सड़कों की खस्ता हालत होने से यह स्पष्ट होता है कि सड़कों के काम में गड़बड़ी की गयी, ऐसा आरोप नागरिक लगाते हुए इसकी जांच की मांग की है.

गड्ढों से बढ़ीं दुर्घटनाएं

शहर में सड़कों का निर्माण करने के लिए सरकार द्वारा नपा को विगत 4 सालों में करोड़ों रुपये दिए गए हैं.इस राशि से शहर के कुछ इलाकों में कांक्रीट तो कुछ इलाकों में डांमर की सड़कों का निर्माण किया गया है.कांक्रीट की सड़क की आयु करीब 10 से 12 वर्ष की वहीं डांमर की सड़क की आयु करीब 6 से 7 साल की होती है लेकिन विगत तीन दिनों से शहर में हो रही बारिश के कारण लगभग सभी सड़कों पर जगह-जगह गड्ढे हो गए हैं. कुछ गड्ढे तो इतने गहरे हैं कि उन पर से गाड़ियां चलाना तो दूर, पैदल चलना तक कठिन हो गया है.गड्ढों के कारण कई बार दुर्घटनायें हुई हैं, जिसमें कुछ लोग घायल भी हुए हैं.जिन सड़कों पर गड्ढे हुए हैं, उनमें से कुछ सड़कों का निर्माण कार्य कुछ साल पहले ही हुआ है.इतने कम समय में सड़कें ख़राब होने से उनके काम में गड़बड़ी किये जाने का आरोप नागरिकों द्वारा लगाया जा रहा है.

 टेंडर के एक साल बाद होता है कार्य

मनमाड शहर में सड़क और गटरों का निर्माण कार्य करने का अजीब और अलग तरीका है. नपा द्वारा टेंडर निकाले जाने के बाद जिस ठेकदार को काम दिया जाता है, वह काम शुरू करने के लिए वर्क ऑडर लेने के बाद तुरंत काम शुरू नहीं करता, करीब एक साल के बाद काम शुरू किया जाता है. ठेका जिसे दिया जाता है, उसकी बजाय काम दूसरा कोई व्यक्ति करता है. हालांकि जिस वार्ड में सड़क, गटर, शौचालय समेत अन्य निर्माण कार्य किये जाते हैं, वह किस दर्जे की हो रही है,  इस पर नजर रखने की जिम्मेदारी नगरसेवक की भी होती है. लेकिन मनमाड में नगरसेवक इस ओर उतना ध्यान नहीं दे रहे हैं, जितना देना चाहिए. इसलिए एक से डेढ़ वर्ष में ही सड़कों की खस्ता हालत हो रही है. सबसे ज्यादा गड़बड़ी सड़कों के निर्माण में होती है, इसलिए इसकी जांच किये जाने की मांग नागरिकों द्वारा की जा रही है. 

-बब्बू शेख