मनपा के टैक्स बकाएदारों की सूची बढ़ी

  • मनपा ने वसूली के लिए लगाई होर्डिंग

नाशिक. कोरोना संक्रमण से देश की आर्थिक स्थिति तहस-नहस हो गई है, जिसका सबसे अधिक विपरीत परिणाम नाशिक महानगर पालिका की आय पर हुआ है. लॉकडाउन के चलते नौकरी-रोजगार बंद होने से संपत्ति और जल कर अदा करने के लिए नागरिकों के पास पैसे नहीं हैं. इसके चलते मनपा के टैक्स बकाएदारों की सूची बढ़ गई है. इसका सबसे अधिक असर शहर के विकास कार्य पर हुआ है.

टैक्स वसूली के लिए मनपा प्रशासन ने बड़े-बड़े बकाएदारों के नाम की होर्डिंग विभागीय कार्यालय के बाहर लगाई है. साथ ही समाचार पत्रों के माध्यम से बकायादारों के नाम प्रसिद्ध करने का निर्णय प्रशासन ने लिया है. बता दें कि राज्य में 24 मार्च से लागू हुआ लॉकडाउन तीन माह के बाद कुछ हद तक शिथिल किया गया. इसके बाद चरण-चरण में कुछ निर्बंध हटाए गए. परंतु औद्योगिक क्षेत्र सहित सभी क्षेत्र में 25 प्रतिशत कामकाज शुरू होने से नागरिकों को आर्थिक नुकसान हुआ. 

108 करोड़ का दिया था लक्ष्य 

अब कुछ हद तक नागरिकों का जनजीवन सुचारु हो रहा है. इस लॉकडाउन से अनेक नागरिकों के रोजगार बंद होने से मजदूर, खेत मजदूर और निर्माण कार्य पर काम करने वाले कामगारों के सामने परिवार का भरण पोषण कैसे करें, यह सवाल सताने से नागरिक मनपा का टैक्स अदा नहीं कर रहे हैं. मनपा ने जल टैक्स विभाग को बकाया और चालू ऐसे कुल 108 करोड़ रुपए का लक्ष्य दिया गया था. 

चालू वसूली 30 प्रतिशत 

इसमें से अब तक बकाया वसूली के रूप में केवल 9 प्रतिशत वसूली हो पाई है. तो चालू वसूली 30 प्रतिशत हुई है. ऐसी ही स्थिति संपत्ति टैक्स की है. इसलिए संपत्ति टैक्स की वसूली बढ़ाने के लिए 1 नवंबर से शुरू अभय योजना को प्रतिसाद नहीं मिला. संपत्ति टैक्स के रूप में 25 हजार से 1 लाख रुपए बकाया होने वाले बकायादारों का आकड़ा 13 हजार 189 है. 

सरकारी कार्यालय बड़ा बकायेदार

साथ ही 1 लाख रुपए बकाया होने वालों में अधिकतर सरकारी कार्यालय हैं. टैक्स वसूली के लिए अब मनपा प्रशासन ने 6 विभागीय कार्यालय के बाहर बड़े बकाएदारों के नाम की होर्डिंग लगाई है. साथ ही इन नामों की सूची समाचार पत्रों के माध्यम से प्रसिद्ध करने का निर्णय लिया है. इस उपाया योजना से बकाया वसूली जल्द से जल्द पूर्ण होगी या नहीं? इस ओर सभी की निगाहें लगी हुई हैं.