एक लाख गर्भवती माताओं को “मातृ वंदन”

  • बड़ी संख्या में महिलाएं ले रहीं 'जननी शिशु योजना' का लाभ
  • योजना के कारण बढ़ गया अस्पतालों में भरती करने का प्रमाण

नाशिक. मजदूरी करने वाली गर्भवती माताओं  (Motherhood) को गर्भावस्था के दिनों में काम ना करना पड़े, साथ ही उनका आर्थिक नुकसान भी ना हो, इसके लिये चलाई जाने वाली मातृ वंदन योजना के अंतर्गत नाशिक जिले की 1 लाख 19 हजार माताओं को आर्थिक लाभ उनके बैंक खातों में जमा किया गया है. दिहाड़ी पर मजदूरी करने वाली महिलाओं को गर्भावस्था में आर्थिक नुकसान ना हो, इसलिये उन्हें मजदूरी करनी पड़ती है, जिससे माता और उसके पेट में पल रहे बच्चे का कुपोषण होने का डर रहता है. ऐसी महिलाओं को अनेक शारीरिक पीड़ा सहन करने का भी डर होता है. ऐसी महिलाओं को गर्भावस्था में काम न करना पड़े और उनका आर्थिक नुकसान भी ना हो, इसके लिये मातृ वंदन योजना शुरू की गई है. नाशिक जिले में अब तक 1 लाख 19 हजार 497 महिलाओं को आर्थिक लाभ दिया गया है. यह आंकड़ा 86 प्रश तक पहुंच गया है.

विभिन्न चरणों में दिए जाते हैं 5 हजार रुपए

गर्भवती माताओं को बच्चे के जन्म तक के दिनों में विभिन्न चरणों में 5 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी जा रही है. गर्भवती माताओं की तरह ही स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए भी ‘जननी शिशु सुरक्षा योजना’ (Janani Shishu Yojana) शुरू की गई है. इसके अनुसार गर्भवती माता की अस्पताल में प्रसूति होने को प्राधान्य देने के साथ-साथ माता और बच्चे की मौत का प्रमाण कम करने के लिये इस योजना का लाभ महिलाओं को दिया जा रहा है. जिसके अनुसार जिले में स्तनपान और शून्य से एक साल की उम्र के बालक को यह सहायता दी गई है.

साथ ही 91 प्रश गर्भवती माताओं को मुफ्त संदर्भ सेवा दी गई है. नाशिक जिले में और साथ ही जिले के आदिवासी इलाकों में महिलाओं के लिये यह योजना लाभदायक साबित हो रही है. इस योजना का लाभ लेने के लिये जनजागृति भी की जा रही है. महिलाओं की सुरक्षा के विषय में भी परिवारों में जागृति की जा रही है. सुरक्षित प्रसूति के लिये माताओं को तत्काल अस्पताल में भरती करने का प्रमाण भी बढ़ता दिखाई दे रहा है. महिला और बालकों की सुरक्षा के लिये चलाई जाने वाली योजना का लाभ लेने का प्रमाण जिले के कई क्षेत्रों में बढ़ गया है.

जनजागृति जरूरी

काम करने की जगहों पर महिला और उनके बच्चों के लिये दी जाने वाली सुविधाओं पर अमल करना जरूरी है, क्योंकि अब तक ऐसी जगहों पर जनजागृति होती नहीं दिखाई दे रही है. माता और बालकों की स्वास्थ्य समस्या बढ़ने  के कई मामले सामने आ रहे हैं.

-अमित जाधव, नागरिक