Nashik Municipal Corporation

    नाशिक. आगामी नाशिक महानगर पालिका चुनाव (Nashik Municipal Corporation Election) को ध्यान में रखते हुए भाजपा (‍BJP) ने तैयारी शुरू कर दी है। इसके चलते उम्मीदवारों की खोज शुरू हो गई है। विद्यमान नगरसेवकों (Corporators) को दोबारा टिकट देने की परंपरा है, लेकिन पिछले 5 सालों में किए गए कार्य का जायजा लेकर टिकट दिया जाने वाला है इसलिए आगामी चुनाव में 22 नगरसेवकों को टिकट नहीं दिया जाएगा, जिसमें पूर्व विधायक बालासाहब सानप के अधिकतर समर्थक शामिल हैं।

    गौरतलब है कि नाशिक महानगरपालिका के 2017 के पंचवार्षिक चुनाव में भाजपा के 66 नगरसेवक चुनकर आए थे। मनपा की इतिहास में पहली बार किसी राजनीतिक पार्टी को बहुमत मिला था। इसके बाद भी 53 माह में संतोषजनक कामकाज भाजपा के पदाधिकारी नहीं कर पाए इसलिए आगामी 7 माह में विविध विकास कार्य का नियोजन भाजपा द्वारा किया जा रहा है। 

    भाजपा के स्थानीय नेता और पदाधिकारी नाराज 

    एक ओर नागरिकों को विकास कार्य दिखाया जा रहा है तो दूसरी ओर संगठन मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। भाजपा के 66 नगरसेवकों में से एक नगरसेवक का निधन हुआ है तो नगरसेविका सरोज आहिरे ने इस्तीफा दिया था। यहां पर उपचुनाव हुआ, जिसमें राष्ट्रवादी कांग्रेस के जगदीश पवार चुनकर आए। पिछले कुछ माह से भाजपा द्वारा किए जा रहे कामकाज पर टिप्पणी की जा रही है, जिसे लेकर भाजपा के स्थानीय नेता और पदाधिकारी नाराज है।

    नगरसेवकों के कामकाज का हो रहा मूल्यांकन

    भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष वसंत गिते और सुनील बागूल ने शिवसेना में प्रवेश किया। इन दो नेता के 5-6 नगरसेवक भाजपा से दूर हो गए है। कोरोनाकाल में पार्टी और नागरिकों की अपेक्षा के तहत कामकाज नहीं हो पाया। इसके चलते मनपा की सत्ता होने के बाद भी भाजपा के नगरसेवक परेशान हो गए है, जिसे गंभीरता से लेते हुए पार्टी ने नगरसेवकों द्वारा किए गए कामकाज को लेकर जानकारी लेते हुए मूल्यांकन शुरू कर दिया है, जिसमें पार्टी कार्यक्रम में सहभागिता, मतदाताओं पर प्रभाव न बनाना, पर्याप्त विकास कार्य न करना, मनपा के कामकाज में शामिल न होना, साढ़े चार साल में मनपा की महासभा में मौजूद न रहना या किसी भी मुद्दे पर चर्चा न करना, विवादास्पद भूमिका लेना, जेरॉक्स नगरसेवक के रूप में परिवार के अन्य सदस्य को फिल्ड पर भेजना, पार्टी की भूमिका मतदाताओं तक न पहुंचाना, वरिष्ठों की बैठक में शामिल न होना, गुंडागर्दी करने आदि शामिल है।

    काम आएगा सानप का वर्चस्व!

    अब तक 22 नगरसेवकों को टिकट न देने की बात हो रही है। इसमें 8 नगरसेवक ऐसे है, जिन्होंने 2019 में हुए महापौर, उपमहापौर चुनाव में पूर्व विधायक बालासाहब सानप द्वारा शुरू किए गए विद्रोह में शामिल हुए थे। आज की स्थिति में सानप भाजपा में शामिल हुए है। उन्हें पार्टी ने प्रदेश उपाध्यक्ष पद दिया है। अब सानप अपने समर्थक नगरसेवकों को पार्टी का टिकट दिला पाते है या नहीं इस ओर सभी की निगाहें लगी हुई है।