197 teachers' December salary halted
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– 10 वर्ष पहले अनुदान देने की हुई थी घोषणा

नाशिक. पिछले 5/6 सालों से गैर अनुदानित विद्यालयों को अनुदान ना मिलने से ऐसे स्कूलों और कॉलेजों के शिक्षकों का आर्थिक शोषण हो रहा है. लॉकडाउन के कारण इन शिक्षकों ही हालत खराब हो गई है. शासन के सामने पिछले 7 सालों से अनुदान मंजूरी का विषय चल रहा है जबकि 10 साल पहले शासन की ओर से अनुदान देने की घोषणा की गई थी. पिछले 10/15 सालों ने बिना अनुदानित शिक्षक बिना किसी वेतन के काम कर रहे हैं. 

शासन से 13 सितंबर 2011 को 20 और 40 प्रश अनुदान मंजूर करने का निर्णय लिया और आदेश भी निकाला गया. इन निर्णय पर आज तक प्रशासन ने किसी प्रकार का अमल नहीं किया. शिक्षकों का वेतन कब शुरू होगा, इसकी प्रतीक्षा हर बिना अनुदानित शिक्षक का परिवार कर रहा है.

परिवार पर आई भूखो मरने की नौबत

कोरोना के संकट के समय में ऐसे कई शिक्षकों के भूखे रहने का समय आ गया है जिनका कोई दूसरा कमाई का साधन नहीं है. संस्था चालक बिना अनुदानित शिक्षकों को अपनी ओर से कुछ नहीं देते. शिक्षक केवल इस आशा में काम कर रहा है कि आज नहीं तो कल अनुदान मंजूर होकर उसका वेतन शुरू होगा.

कोरोना के डर से क्लास भी बंद

 ऐसे में कुछ शिक्षकों ने अपने उदर निर्वाह के लिये निजी क्लास शुरू कर दिये थे, लेकिन कोरोना विषाणु के संसर्ग के डर से उन्हें क्लास भी बंद करने पड़ गए हैं. जिससे उनका आर्थिक नियोजन बिगड़ गया है. अन्य व्यवसाय भी बंद हो गए. लॉकडाउन के दिनों में ऑनलाइन क्लासों का प्रश्न भी निर्माण हो गया है. ऐसे में बिना अनुदानित शिक्षकों से काम लेने पर पूरा वर्ग नाराज दिखाई दे रहा है.