कृषि बिल पर राष्ट्रपति न करें हस्ताक्षर

  • सत्य शोधक ग्रामीण कष्टकरी सभा ने लगाई गुहार

साक्री. सत्यशोधक ग्रामीण कष्टकरी सभा के कार्यकर्ताओं ने सुभाष काकुस्ते के नेतृत्व में ‘भारत बंद आंदोलन’ के मौके पर केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से किसानों के हित के खिलाफ संसद में पारित कृषि बिल पर हस्ताक्षर न करने की मांग की है. इस संबंध में राष्ट्रपति के नाम से तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा गया. ज्ञापन में कहा गया है कि राष्ट्रपति हस्तक्षेप करें और किसानों के हितों के खिलाफ केंद्र सरकार द्वारा संसद में पास कराए विधेयकों पर हस्ताक्षर नहीं करें

केंद्र सरकार ने कोरोना लॉकडाउन के दौरान देश भर के किसानों पर जो तेज हमला किया है, उससे किसानों को बचाने में देश के किसानों का साथ देने की महामहिम कृपा करें और देश के संवैधानिक प्रमुख होने के नाते  राष्ट्रपति किसानों की मांगें पूरी करने के केंद्र सरकार को निर्देश देने की ग्रामीण कष्टकरी सभा ने गुहार लगाई है. अखिल भारतीय किसान महासभा में 250 से अधिक किसान तथा कृषि मजदूर संगठनों के मोर्चे जुड़े हैं.

केंद्र के निर्णय से किसान निराश

अपने ज्ञापन में संगठन ने कहा है कि केंद्र सरकार ने अपने कृषि सुधार पैकेज की घोषणा की तो उसमें समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, बल्कि उन्हें बढ़ा दिया गया है, इसे देखकर किसानों को निराशा हुई है. सरकार ने संसद में जो बिल पारित किये हैं,  जिसके कारण किसानी की व्यवस्था, खाद्यान्न उत्पादन, खरीद, परिवहन, भण्डारण, प्रसंस्करण, बिक्री जैसे ‘खाने’ की श्रृंखला को बड़ी कम्पनियों के हवाले करना चाहती है.

मेहनतकशों को बर्बाद करने का प्रयास

यह किसानों के साथ छोटे दुकानदारों और छोटे व्यवसायियों को बरबाद कर देगी. उक्त नई व्यवस्था विदेशी व घरेलू कारपोरेट तो मालामाल करेगी, पर देश के सभी मेहनतकश, विशेषकर किसान नष्ट हो जाएंगे. ग्रामीण कष्टकरी सभा के प्रदर्शन में किसानों और सभा के पदाधिकारी  वंजी गायकवाड, सुभाष काकुस्ते, यशवंत मालचे, मनसाराम पवार, मेरुलाल पवार, किरण पवार, जीवन गावित,रमण मालवी, पोपट मालचे, कुमार सोनवणे, गुलाब भोये कॉ. राकेश भोसले,गोरख कुवर, रामलाल गवली शामिल हुए.