Protest of farmers on the road, know what is the whole matter

    येवला. मंडी समिति परिसर में बेचे जाने वाले प्याज (Onion) के बदले नकद पैसे (Cash Money) की मांग को लेकर एक व्यापारी के प्रतिनिधि द्वारा किसान की पिटाई के विरोध में किसानों ने येवला शहर स्टेट हाईवे पर एक घंटे तक धरना दे कर सड़क पर प्रदर्शन (Protest)किया। जिससे काफी दूर तक दोनों तरह वाहनों की लंबी कतार लग गई। किसानों ने ठान लिया था कि वह सड़क तभी खाली करेंगे जब तक पिटाई करने वाले व्यापारियों के लाइसेंस निलंबित करके कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा। 

    आखिरकार पुलिस की मध्यस्थता से डेढ़ घंटे के बाद लोग शांत हुए और सड़क खाली किया। बाजार समिति विवाद को सुलझाने के लिए देर रात तक बैठकें होती रहीं।

    मामले की जांच कर होगी उचित कार्रवाई

    कृषि उपज मंडी समिति में प्याज की नीलामी के बाद अपने माल के लिए पैसे लेने येवला गए ममदापुर के किसान अक्षय भाऊसाहेब गुडघे को एक व्यापारी के कर्मचारी ने पीटा और उसके हाथ में पकड़ी प्याज की रसीद भी फाड़ दी। गुडघे ने बताया कि इसके बाद बाजार समिति परिसर के बाहर सड़क से जाते हुए उसका पीछा करते हुए बस स्टैंड के चौराहे पर एक ट्रैक्टर को रोक कर उसकी पिटाई की गई। गुस्साए किसानों ने बस स्टैंड के सामने ट्रैक्टर लगाकर आंदोलन शुरू कर दिया। किसानों ने व्यापारियों के खिलाफ कार्रवाई और उनके लाइसेंस निलंबित करने की मांग की। गुडघे के साथ हरिभाऊ महाजन, किसान संघ के तहसील अध्यक्ष और प्रहार संगठन, शिवसेना के तहसील प्रमुख रतन बोरनारे ने भी आंदोलन में भाग लिया। सड़क के एक घंटे से अधिक समय तक खुला नहीं रहने के कारण राजमार्ग के दोनों किनारों पर भारी ट्रैफिक जाम था, लेकिन यातायात के लिए सड़क को खाली करने के लिए पुलिस का सहारा लिया गया, यहां पुलिस ने बल प्रयोग नहीं किया। शहर के पुलिस निरीक्षक संदीप कोली ने किसानों को आश्वासन दिया कि मामले की जांच करके उचित कार्रवाई की जाएगी।

    निलंबित हो व्यापारी का लाइसेंस, मांगे माफी

    विवाद को सुलझाने के लिए बाजार समिति ने बैठकें की। इस दौरान मुख्य प्रशासक वसंत पवार, व्यापारी संचालक नंदकुमार अटल और अन्य व्यापारी, सचिव कैलाश व्यापारे, चंद्रकांत शिंदे, हरिभाऊ महाजन, रतन बोरणारे, रयत क्रांति के वाल्मिक सांगले, गुडघे और अन्य के साथ लोकप्रतिनिधि और किसान संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित रहे। किसानों ने मांग की कि संबंधित व्यापारी को माफी मांगनी चाहिए और मंडी समिति को उसका लाइसेंस निलंबित कर देना चाहिए। मंडी समिति के नियमानुसार जब कृषि उपज का नकद भुगतान करना हो तो भुगतान न करना और इस प्रकार किसानों को पीटना गलत है। हरिभाऊ महाजन, रतन बोरणाने और अन्य ने मांग की कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

    शनिवार और रविवार को बैंक बंद रहने के कारण हम शनिवार को खरीदे गए प्याज का भुगतान नहीं कर सके। शनिवार की सुबह खरीदी गई प्याज के लिए किसानों का भुगतान किया। 2 दिन की छुट्टी होने के कारण व्यापारियों को आज बैंक से कम नकदी मिली थी इसलिए सोमवार को खरीदे गए प्याज का भुगतान करना मुश्किल था, इसलिए जब कर्मचारियों ने कहा कि वे कल भुगतान करेंगे, तो विवाद बढ़ गया।

    -नंदकुमार अट्टल, व्यापारी संचालक, कृषि उत्पन्न बाजार समिति