नीलामी में किसानों को मिल रहे प्याज के रिकार्ड दाम

बाहरी राज्यों से प्याज की बढ़ी मांग

साक्री. देशभर में प्याज की बढ़ी हुई मांग और बरसाती संकट के चलते प्याज के दाम आसमान छूने लगे है. तहसील में बड़े पैमाने पर प्याज की उपज होती है. बाहरी राज्यों से प्याज की मांग में उछाल आने से स्थानीय कृषि उपज मंडियों में विगत दो दिनों से प्याज के लिए रिकार्ड बोलियां लगी हैं. मंडियों के सूत्रों ने बताया कि प्रति क्विंटल छब्बीस सौ से ज्यादा भाव किसानों को मिला है, जिससे किसानों में खुशी की लहर दौड़ गई है. किंतु जानकारों की बात मानें तो बढ़े हुए दामों का लाभ आगे चलकर किसानों की बजाय व्यापारियों को ही मिलेगा. क्योंकि प्याज के गिरते दामों को देखते हुए कई किसानों ने पहले ही आनन-फानन में कम भावों में प्याज ही बेच दिया है.

दो दिन से शुरू हुई मंडी में नीलामी

अभी केवल दो दिन पूर्व ही प्याज की नीलामी फिर से शुरू हुई है. प्याज की आवक भी बढ़ी हुई है. मंडी के चेयरमैन पोपटराव सोनवणे ने बताया कि किसानों के हित में और व्यापारियों की सुविधा का ध्यान रखा जाता है, इसलिए सही दाम, सही तौल और नगद भुगतान से किसान खुश हैं. स्थानीय व्यापारियों की मानें तो देशभर में  मोटे तौर पर जहां प्याज की उपज होती है, वहां प्याज की फसलों का काफी नुकसान हुआ है. बड़े शहरों में प्याज की स्थायी मांग बनी रहने से आपूर्ति की कमी के चलते प्याज के दाम बढ़ रहे हैं.

अच्छे दर्जे के प्याज की मांग अधिक

सूबे के नाशिक जिले में स्थित लासलगांव तहसील प्याज की सबसे बड़ी मंडी है और वहीं से देशभर के व्यापारी प्याज खरीदते हैं. प्याज की नीलामी में  2371रुपये क्विंटल की रिकॉर्ड दर किसानों को मिली थी. ऊंचे दर्जे के प्याज की मांग अभी भी बनी हुई है, जिसे और ज्यादा दाम मिलने की संभावना है. तहसील के पिंपलनेर शहर में कृषि उपज मंडी का उप बाजार है. यहां बुधवार को 2,605 रुपये प्रति क्विंटल के रिकार्ड दाम पर प्याज की नीलामी हुई. दूसरे दिन 2655 रुपये प्रति क्विंटल के दाम में प्याज बिक गया. शुक्रवार को मंडी को छुट्टी है, दामों में वृद्धि की ओर झुकाव बने रहने की उम्मीद है. अब तक ऊंचे दर्जे के प्याज को औसत दाम 2,000 से 2,300 रुपये और  मध्यम श्रेणी के प्याज को 1,400 से 1,800 रुपये प्रति क्विंटल बोली लगी थी. दागी और हल्के दर्जे के प्याज के 400 से 600 रुपए प्रति क्विंटल भाव रहे थे.

बढ़ते दाम से किसानों में खुशी

प्याज के बढ़ते दामों से किसान खुश है. लेकिन बढ़ती मांग के मद्देनजर व्यापारियों का मानना हैं कि अगर प्याज के दामों में वृद्धि  बनाए रखना है तो किसानों को आपाधापी नहीं करनी चाहिये. उचित आपसी प्रबंधन करते हुए माल को बाजार में लाया जाना चाहिए. स्थानीय किरण कोठावदे, गजेंद्र कोतकर, नासिर सैय्यद,रावसाहेब घरटे, अमोल पाटिल, आबा बागड़, प्रमोद कोठावदे, नीलेश चौधरी, राजू शिरसाठ,  भाऊसाहेब पाटिल, , दीपक भदाणे, महेश भदाणे, उमेश कोतकर आदि व्यापारियों ने नीलामी में हिस्सा लिया.

सड़ने के डर से पहले ही कई किसानों ने बेचा

प्याज की मांग में अभी वृद्धि हुई है, लेकिन मांग के अभाव में कुछ दिनों पहले प्याज के दाम तेजी से गिर रहे थे. ज्यादा दिन पड़ा प्याज विशेषकर बरसाती मौसम में सड़ने लगता है. इससे किसानों में घबड़ाहट पैदा कर दी. दामों में और गिरावट आने के अंदेशे को देखते हुए अपना माल बेच दिया. व्यापारियों के पास कम दामों की खरीद किया प्याज भंडारण में है. किसानों को बढ़े दामों का लाभ कितना मिलेगा, जिनके पास अभी प्याज है वही इसका लाभ उठा पाएंगे.व्यापारी बताते हैं कि प्याज की मांग वर्तमान में पंजाब, पश्चिम बंगाल, दक्षिण भारत से आ रही है, तथा अभी प्याज के दामों में हो रही तेजी बने रहने के आसार हैं.