नाशिक कृषि मंडी से शेड-ठेले हटाने से बंद रोजगार

दुकानदारों के सामने गंभीर संकट

पूर्व सभापति शिवाजी चुंभले का आरोप

नाशिक. नाशिक कृषि मंडी समिति के परिसर से पतरे के शेड और ठेले को अतिक्रमण की आड़ में हटाए गए हैं. हालांकि इससे किसी को भी कोई समस्या नहीं थी. कोरोना से पहले से ही आर्थिक संकट का सामना कर रहे दुकानदारों का अब रोजगार बंद हो गया है. ऐसा आरोप पूर्व सभापति शिवाजी चुंभले ने लगाते हुए कहा, मंडी समिति की खुली जगह पर पहले पेशाब करने एवं  कूड़ा फेंकने का काम होता था. इस जगह पर विविध व्यावसायिकों ने खुद के खर्च से पतरे के शेड और ठेले लगाए. इसका मासिक किराया भी वह मंडी समिति को दे रहे थे. इससे मंडी समिति की आय भी बढ़ रही थी. फिर भी अतिक्रमण के नाम पर पतरे के शेड और ठेले हटाते हुए इन लोगों का रोजगार बंद किया. पेठरोड के मार्केट परिसर में चार साल पहले 25 बाय 50 फीट के गाले का निर्माण किया गया, लेकिन यहां व्यापारियों से किराया वसूल नहीं किया गया.

सेंट्रल बेअर हाउस की जगह उपयोग में लाएं

मंडी समिति को जगह की कमी महसूस हो रही है तो सेंट्रल वेअर हाउस की 25 हजार 768 चौरस फीट जगह व्यापारियों के हित के लिए उपयोग में लाना गलत नहीं है. परंतु ऐसा न करते हुए 40 से 50 रुपए प्रति चौरस फीट किराया वाली जमीन 29 साल के अनुबंध पर तीन से साढ़े तीन रुपए प्रति फीट किराए से देने का प्रयास सभापति संपत सकाले कर रहे हैं. मंडी समिति कार्यालय के सामने कई सालों से ठेले थे, जो प्रति माह एक हजार रुपए किराया दे रहे थे.

लोगों को आसानी से मिलता था चाय-नाश्ता

उन पर कार्रवाई नहीं की जा रही है. इससे विपरीत किसान और व्यापारियों के लिए चाय-नाश्ता, भोजन की सुविधा देने वाले ठेले धारकों पर कार्रवाई की गई. इससे उनका रोजगार बंद हो गया है. इस बारे में जानकारी देते हुए मंडी समिति के सभापति संपत सकाले ने कहा, मंडी समिति परिसर में अनधिकृत तौर पर पतरे के शेड और ठेले लगाए गए थे. इससे किसानों को समस्या निर्माण हो रही थी. संबंधित व्यक्तियों को नोटिस जारी कर पतरे के शेड और ठेले हटाने के आदेश दिए थे, लेकिन उन्होंने नहीं निकाले. इसलिए मंडी समिति प्रशासन ने पतरे के शेड और ठेलों को हटाया. इसके बाद मंडी समिति परिसर में किसी ने भी अतिक्रमण किया तो सख्त कार्रवाई की जाएगी.