No irregularities in the smart city, Commissioner Munde revealed

  • चुनिंदा ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने हो रही देरी
  • विपक्ष के नेता अजय बोरस्ते का आरोप

नाशिक. गाजे-बाजे के साथ स्मार्ट सिटी कंपनी के माध्यम से शहर में शुरू की गई अनेक महत्वाकांक्षी परियोजनाओं का निर्माण कार्य कछुआ गति से चल रहा है. परिणामस्वरूप संबंधित परियोजनाओं की लागत बढ़ने से उसका आर्थिक बोझ नाशिकवासियों को ढोना पड़ेगा. प्रोजेक्ट गोदा सहित बहु मंजिली पार्किंग, एलईडी, कौशल्य विकास के कार्य की गति अत्यंत धीमी है. इसलिए कुछ चुनिंदा ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए परियोजना पूर्ण करने में देरी करने का आरोप विपक्ष के नेता अजय बोरस्ते ने लगाया है.

भाजपा की इस महत्वाकांक्षी योजना की धीमी गति पर महापौर सतीश कुलकर्णी के नाराजगी व्यक्त करने के बाद विपक्ष के नेता अजय बोरस्ते ने इस पर हमला बोला. स्मार्ट प्रकल्प पूर्ण करने के लिए 6 महीने से लेकर 2 वर्ष तक का समय दिया गया था, लेकिन अब तक एक भी कार्य पूर्ण नहीं हुआ है. मनपा की इमारतों पर सोलर प्रकल्प के लिए अक्टूबर 2018 में कार्यारंभ आदेश देते हुए 6 महीनों का समय दिया गया था, लेकिन प्रत्यक्ष में 2 वर्ष लग गए. पानी की एक-एक बूंद का हिसाब रखने वाले स्काडा प्रकल्प पर लाखों रुपए खर्च होने के बाद स्मार्ट सिटी कंपनी ने उसे बंद कर दिया. शहर के 92 हजार पथदीपों पर एलईडी बल्व बिठाने की पीपीई योजना 20 अगस्त 2019 को शुरू हुई थी, जो साढ़े नौ महीने में पूर्ण होना अपेक्षित था, लेकिन उसे 6 महीने का अतिरिक्त समय दिया गया. स्मार्ट पार्किंग प्रकल्प 2 वर्ष के बाद भी पूरा नहीं हुआ. स्मार्ट पार्किंग बहुमंजिली होना अपेक्षित था.

भू-अधिग्रहण कर पार्किंग की व्यवस्था

 इसके लिए मुख्य रास्ते पर दुकानदारों की जमीन आरक्षित कर पार्किंग की व्यवस्था की गई थी. यशवंत मंडई में बहुमंजिली पार्किंग के लिए टेंडर निकाला गया, लेकिन पेंचीदा शर्तों के कारण उसे प्रतिसाद नहीं मिला. स्मार्ट सिटी कंपनी के सीईओ प्रकाश थविल के मनमानी कार्यप्रणाली के कारण शहर का नुकसान होने की बात करते हुए बोरस्ते ने परियोजना पर होने वाले अतिरिक्त खर्च के लिए स्मार्ट सिटी कंपनी के जिम्मेदार होने की बात कही.

4 प्रतिशत पूरा हुआ प्रोजेक्ट गोदा का कार्य

गोदावरी नदी की खूबसूरती बढ़ाने वाले 62 करोड़ के प्रोजेक्ट गोदा के लिए सितंबर 2019 में कार्यारंभ आदेश दिया गया, लेकिन अब तक केवल 4 प्रतिशत कार्य हुआ है. केवल आधा प्रतिशत निधि खर्च हुई है. परियोजना का समय मार्च 2021 तक है. आगामी 6 महीने में 96 प्रतिशत कार्य किस प्रकार से पूरा होगा? इस पर बोरस्ते ने प्रश्न खड़ा किया. होलकर पुलिया के नीचे मैकेनिकल गेट बिठाया जा रहा है, जिसके लिए एक वर्ष से अधिक समय खर्च हुआ है, लेकिन केवल 7 प्रतिशत कार्य ही हुआ है.