विद्यार्थियों की एनर्जी ड्रिंक नहर में फेंकी

  •  स्कूल प्रबंधन की लापरवाही उजागर
  •  फरवरी 2020 लिखी है निर्माण तिथि

धुलिया.आदिवासी समाज में शिक्षा का प्रमाण बढ़ाना एवं बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए सरकार आश्रमशाला के माध्यम से पुरजोर कोशिश कर रही है. जिसके तहत बच्चों को विभिन्न सुविधाएं मुहैया कराई जा रही  हैं, किंतु आदिवासी बच्चों के लिए आने वाली एनर्जी ड्रिंक के बाक्स स्कूल के पिछवाडे़ खेत व नहर में फेंके जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है. इससे स्कूल प्रबंधन समेत संचालन करने वाला पीओ कार्यालय पर भी सवालिया निशान उठने लगे हैं. बच्चों को एनर्जी ड्रिंक ना देते हुए नालियों और खेत में फेंका जा रहा है.

स्कूल प्रबंधन का गैर जिम्मेदाराना व्यवहार

शिरपुर तहसील के जामण्यापाड़ा आश्रमशाला के पीछे उक्त मामला सामने आया है. यहां की आश्रमशाला के पीछे खेत और नहर है, जिसमें आदिवासी बच्चों के लिए आई एनर्जी ड्रिंक के बॉक्स फेंके दिए गए हैं. पैक बॉक्स में एनर्जी ड्रिंक की बोतलें पैक हैं. जिन पर 22 फरवरी 2020 ऐसी मैन्यू फैक्चरिंग डेट लिखी गई है. आश्रम शाला प्रशासन की उदासीनता के चलते एनर्जी ड्रिंक बच्चों को दिए बिना फेंक दी गई है, जिससे आश्रमशाला प्रबंधन का बच्चों के प्रति लापरवाही व अनदेखी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है.

पीओ कार्यालय का स्कूल प्रबंधन पर खौफ नहीं

ऐसे निंदनीय कृत्य करनेवाले स्कूल प्रबंधन पर पीओ कार्यालय धुलिया का नियंत्रण नहीं है. ये भी स्पष्ट हो गया है. इससे पहले भी तहसील की आश्रमशालाओं मे कई मामले सामने आये थे. जो मिटाये जाने का आरोप आदिवासी संगठन लगाते हैं. जिससे आदिवासी बच्चों का काफी नुकसान हो रहा है.

दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग

इस पूरे मामले में पुलिस एफ आई आर दर्ज कर मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग आदिवासी संगठन द्वारा की जा रही है. सरकार आदिवासी बच्चों को मुख्यधारा में लाने के लिए करोड़ रुपए खर्च कर रही है. वहीं मिशनरी विभाग की लापरवाही के कारण सरकार के लाखों रुपए नहर एवं खेत में फेंके जा रहे हैं.

गौरतलब है कि आदिवासियों को मुख्यधारा में लाने के लिए सरकारी स्तर पर काफी प्रयास किये जा रहे हैं लेकिन कुछ लोगों की उदासीनता एवं कर्तव्य के प्रति लापरवाही के कारण सरकार अपने लक्ष्य को हासिल नहीं कर पा रही है. सरकार आदिवासी बच्चों को पौष्टिक आहार के रूप में एनर्जी ड्रिंक की व्यवस्था की है. इसी के साथ बच्चों को अन्य सुविधाएं दी जा रही हैं, जिससे पढ़ाई के साथ ही वे स्वस्थ रहें, लेकिन स्कूल प्रबंधन सरकार के प्रयास पर पानी फेर रहे हैं. लोगों ने ऐसे गैरजिम्मेदार प्रबंधन पर लगाम लगाने की मांग की है.