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नाशिक. रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करने वाले जिला सरकारी अस्पताल के संदिग्ध ठेका कर्मी को अस्पताल प्रशासन ने सरकारवाड़ा पुलिस के हवाले कर दिया. इस कर्मी को तत्काल नौकरी से बेदखल करने की जानकारी जिला शल्य चिकित्सक डॉ. रत्ना रावखंडे ने दी. कोविड पीड़ित मरीजों को कोरोना से मुक्त करने में उपयुक्त साबित होने वाले रेमडेसिविर इंजेक्शन की जिला सरकारी अस्पताल के ठेका कर्मी द्वारा कालाबाजारी कर खुले मार्केट में बिक्री करने की बात सामने आई थी. इस इंजेक्शन की किल्लत को दूर कर उसे मरीजों तक पहुंचाने के लिए अस्पताल प्रशासन लगातार प्रयास कर रहा था. इस बीच अस्पताल से इसकी चोरी व बिक्री होने की बात सामने आने से प्रशासन सक्ते में आ गया था. जिला सरकारी अस्पताल का ठेका कर्मी इस इंजेक्शन को खुले मार्केट में कम दामों में बिक्री कर रहा था. मामले की गंभीरता को ध्यान में रखकर जिलाधिकारी सूरज मांढरे ने मामले की जांच शुरू की थी.

संदिग्ध कर्मी निलंबित

जिला सरकारी वकील अजय मिसर व जिला प्रशासन के विधि अधिकारी हेमंत नागरे से चर्चा करने के बाद डॉ. रावखंडे ने संदिग्ध कर्मी की जांच करने के बाद उसे पुलिस के हवाले कर दिया. इसके खिलाफ अस्पताल के औषधि निर्माण अधिकारी जितेंद्र सोनवणे ने शिकायत दर्ज कराई. संबंधित कर्मी को तत्काल कार्यमुक्त करने का निर्देश दिया गया है. इस मामले में शामिल अन्य लोगों के खिलाफ भी कठोर कार्रवाई होगी.  

-सूरज मांढरे, जिलाधिकारी

आरोपी को किया गिरफ्तार

जिला अस्पताल के संबंधित कर्मी को हमने कब्जे में ले लिया है. इसके पास से जानकारी प्राप्त करने का प्रयास किया जा रहा है. जांच के बाद एफआईआर दर्ज किया जाएगा.

-हेमंत सोमवंशी, वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक, सरकारवाड़ा पुलिस थाना