भुजबल की बैठकों में विपक्ष क्यों नहीं ?

नाशिक. नाशिक जिले में समस्याओं को लेकर कलक्ट्रेट में नियमित रूप से बैठकें आयोजित की जाती हैं. जिले के पालक मंत्री छगन भुजबल इन बैठकों का मार्गदर्शन कर रहे हैं. भुजबत तत्काल निर्णय लेने में सक्षम हैं यह सभी जानते हैं. लेकिन इन होने वाली बैठकों में सत्तारूढ़ और विपक्षी दल दोनों उपस्थित क्यों नहीं होते? इस पर तर्क-वितर्क किया जाता है. विपक्षी विधायकों ने अब इस बारे में बात करना शुरू कर दिया है और कई पालक मंत्री भुजबल द्वारा लिए गए निर्णय पर ध्यान दे रहे हैं. चाहे वह कोरोना का संकट हो या नाशिक जिले में किसी प्रकार की अन्य समस्या, छगन भुजबल, पालक मंत्री के रूप में तात्कालिक बैठक कर समस्या को हल करने का आदेश दे रहे हैं. इस कारण उन्हें सभी कामों का श्रेय मिलता है. कुछ सभाओं में महाविकास अघाड़ी के जिले के विधायक शामिल होते हैं. लेकिन विपक्षी विधायक विशेष रूप से भाजपा सांसद, विभिन्न बैठकों में शामिल नहीं हुए. ऐसी शंकाएं उठ रही हैं कि क्या उन्हें बैठकों में बुलाया नहीं जाता. 

विपक्षी विधायकों की भागीदारी हो

भाजपा सांसदों ने राकांपा सांसदों से अपील की कि आप भी बैठकों में शामिल न हों, हम सभी एक साथ आएं और बैठकों के बारे में अपनी आवाज बुलंद करें. लेकिन उनमें से लगभग सभी ने भुजबल का विरोध करने से इनकार कर दिया और इस बात का समर्थन किया कि जो कुछ भी चल रहा है वह जारी रहना चाहिए. नाशिक जिले में स्कूलों को शुरू करने के लिए आयोजित बैठक में विपक्षी विधायकों की भागीदारी न होने के कारण भाजपा विधायक देवयानी फरांदे ने विरोध व्यक्त किया था.

‘हमें भुजबल के नेतृत्व में विश्वास’

महाविकास अघाड़ी सरकार राज्य में बहुत अच्छा काम कर रही है और हम अपने संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में लोगों की सेवा कर रहे हैं. पालक मंत्री जब भी जरूरत महसूस करते हैं हमें बुलाते हैं और हमें बैठकों में भाग लेने का निर्देश देते हैं. इसलिए हम सभी उनके नेतृत्व में एक हैं, ऐसे विचार सिन्नर के विधायक मणिकराव कोकाटे, निफाड के दिलीप बनकर, कलवण के विधायक नितिन पवार, इगतपुरी के विधायक हीरामन खोसकर ने व्यक्त किए हैं.

लगता है फडणवीस आदेश को भूल गए 

देवेंद्र फडणवीस ने एक फरमान जारी किया था कि सरकारी अधिकारियों को विपक्षी नेताओं द्वारा बुलाई गई बैठकों में शामिल नहीं होना चाहिए. लगता है वे अपने ही आदेश को भूल गए हैं. यही कारण है कि वे विभिन्न जिलों में जा रहे हैं और सरकारी अधिकारियों की बैठकें कर रहे हैं. इससे पहले राज्य के खाद्य और आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल ने व्यंग्यात्मक सलाह दी थी कि उन्हें स्व-शासन का पालन करना चाहिए. सभी जन प्रतिनिधियों को बैठकों के लिए बुलाया जाना चाहिए. जिला कलेक्टर सूरज मांढरे, पुलिस आयुक्त दीपक पांडे, नगर आयुक्त जाधव और अन्य की उपस्थिति में बैठकें आयोजित की जाती हैं. लेकिन भाजपा के सांसदों को इन बैठकों में कभी नहीं बुलाया जाता है. नाशिक सेंट्रल की विधायक देवयानी फरांदे इस बारे में बताती हैं कि पालक मंत्री को सभी जनप्रतिनिधियों को सम्मान देना चाहिए, क्योंकि ये बैठकें लोगों की समस्याओं के बारे में होती हैं.

भाजपा की राजनीति अलग 

राज्य के विपक्षी नेताओं देवेंद्र फडणवीस और प्रवीण दरेकर ने अपनी यात्रा के दौरान नाशिक जिला सरकारी और बिटको अस्पताल का दौरा किया था. इस बीच मेयर ने कोरोना परीक्षण के लिए उपकरणों की खरीद बंद कर दी थी. लेकिन ऐसा भाजपा के भीतर मतभेदों के कारण लगता है. जिले के सभी भाजपा विधायक उस समय मौजूद थे.

पार्टी की कोई सीमा नहीं 

राजनीति अधिकारियों के स्तर के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों में होनी चाहिए. कई अधिकारी कुछ जनप्रतिनिधियों के काम को ‘करीब’ से देखते हैं. पार्टी की कोई सीमा नहीं है. जनप्रतिनिधियों की कृपा उनके दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है. अधिकारी भाजपा के जनप्रतिनिधियों को सुनते हैं, जबकि सरकारी अधिकारी महाविकास अघाड़ी के नेताओं को सुनते हैं.