महंगा पड़ गया लालच ठग के जाल में फंसी महिला जज

पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज (Nishanebaaz), यदि कोई जज ही ठीक से जजमेंट न कर पाए तो किस काम का! जज की निगाह पारखी रहनी चाहिए. उसे सज्जन-दुर्जन, असली-नकली, ईमानदार और बेईमान की पहचान वैसी ही होनी चाहिए जैसे कि कोई उड़ती चिड़िया के पंख पहचान ले. कोई भोला-भाला व्यक्ति जज बन ही नहीं सकता.’’ हमने कहा, ‘‘ऐसा क्या हो गया कि आपको जज की याद आ गई? क्या किसी जज की अदालत में गवाही देकर आए हैं या जज के सामने किसी की जमानत ली है?’’

पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, मामला यह है कि एक धोखेबाज ने कर्नाटक हाईकोर्ट की रिटायर्ड जज इंद्रकला बीएस (HC judge Indrakala B S) को बुरी तरह ठगा. युवराज रामदास (Yuvaraj Ramadas) नामक इस ठग ने ज्योतिषी होने का नाटक करते हुए पूर्व हाईकोर्ट जज को प्रशासन में उच्च पद दिलाने का वादा करते हुए 8 करोड़ रुपए से भी ज्यादा की धोखाधड़ी की. उसने मीठी-मीठी और गोलमोल बातें करते हुए रिटायर्ड महिला जज को जाल में फंसाया और वह उसे मोटी रकम देती चली गई. उसने पल भर के लिए नहीं सोचा कि यह ज्योतिषी नंबर वन का फ्राड है.’’ हमने कहा, ‘‘इसमें उस महिला जज की ही गलती है. पुलिस वालों और जज को सज्जन-दुर्जन की पहचान होनी चाहिए. एक नजर में भांप लेना चाहिए कि आदमी कैसा है.’’ पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, किसी की फितरत उसके चेहरे पर थोड़े ही लिखी रहती है! किसे पता चलता है कि भेड़ की खाल पहने भेड़िया सामने आ गया है? उस जालसाज ज्योतिषी ने कई बड़े लोगों से अपना संबंध होने के झूठे दस्तावेज जज को दिखाए और उसकी भावनात्मक कमजोरी का गलत लाभ उठाया.

रिटायर्ड जज भी ऊंचा पद पाने के लालच में फंसती चली गई और मोटी रकम से हाथ धो बैठी. शायद यह सोच रही होगी कि वह ज्योतिषी अपने किसी कनेक्शन के जरिए उसे लोकायुक्त या किसी न्यायिक जांच कमेटी का चेयरपर्सन बनवा देगा. अच्छा हुआ कि ठगे जाने का एहसास होने पर महिला जज ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवाई और फिर उस धोखेबाज के यहां छापा मारकर पुलिस ने 91 करोड़ रुपए कैश और 26 लाख रुपए के चेक बरामद किए.’’ हमने कहा, ‘‘इस घटना से आप भी सतर्क हो जाइए. किसी अपरिचित की चिकनी-चुपड़ी बातों में मत आइए. वह मीठा ठग हो सकता है. आपने गीत भी सुना होगा- मीठी-मीठी बातों से बचना जरा, दुनिया के लोगों में है जादू भरा.’’