शादी का ऐसा भी जश्न, फायरिंग का हुआ मन, दुल्हन ने चलाई गन

    पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज, उत्तरप्रदेश के प्रतापगढ़ में एक दुल्हन ने रिवाल्वर से हवाई फायर करते हुए विवाह मंडप के स्टेज पर कदम रखे. इसके बाद रूपा पांडे नामक उस युवती के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज किया.’’ हमने कहा, ‘‘यूपी में खुशी के मौके पर बंदूक से हवाई फायर करने का रिवाज है. आम तौर पर यह काम मर्दों का है लेकिन इस बार खुद दुल्हन ने गन चला दी और सिद्ध कर दिया कि वह रिवाल्वर रानी है. शायद वह जताना चाहती थी कि ‘मुझे खुशी मिली इतनी कि मन में न समाए’.

    वैसे गोली दागकर उसने अपने दूल्हे को भी संकेत दे दिया कि आगे उसकी फायरिंग से बचके रहना. वह ऐसी युवती नहीं है जिसके बारे में कहा जाए- अंखियों से गोली मारे, लड़की कमाल रे! वह सीधे रिवाल्वर का ट्रिगर दबाती है.’’ पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, यह चिंता की बात है कि जिन हाथों में किचन का चाकू होना चाहिए, वे बंदूक का घोड़ा दबाने लगे. मेहंदी रचे कोमल हाथों में गन की क्या जरूरत है! उस दुल्हन को यह एडवेंचर करने की क्या जरूरत थी?’’ हमने कहा, ‘‘आपकी सोच पुरुषवादी है. महिलाएं भी पुलिस और फौज में रहती हैं. वे तीर-तलवार से लेकर तमंचा तक चलाती आई हैं. एशियाड-ओलंपिक में भी शूटिंग में मेडल जीत चुकी हैं. उनका निशाना बिल्कुल सटीक बैठता है. महिला की पैनी नजर पुरुष के मन का हाल जान लेती है. आपने फिल्म ‘सांड की आंख’ देखी होगी जिसमें तापसी पन्नू राइफल शूटिंग करने वाली दादी बनी है. वह अपनी निशानेबाजी से सभी को चकित कर देती है.’’

    पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, जरा उस युवती के पति के बारे में सोचिए कि वह कितना भयभीत रहेगा. दफ्तर में बॉस का डर और घर लौटे तो फूलनदेवी रूपी पत्नी मौजूद मिलेगी.’’ हमने कहा, ‘‘इतना घबराने की क्या जरूरत! कोरोना संकट में कितनी ही कंपनियों में बॉस ने अपने कर्मचारियों को छोटी-मोटी गलती का बहाना लेकर नौकरी से निकाल दिया और डांट कर कह दिया- यू आर फायर्ड! दफा हो जाओ यहां से! इसलिए फायरिंग से डरना नहीं चाहिए. अच्छे-अच्छे तुर्रम खां भी घर के भीतर अपनी बेगम की फायरिंग सिर झुकाकर बर्दाश्त करते हैं.’’