शाह से पंगा लेने का नतीजा सीबीआई के निशाने पर ममता का भतीजा

    पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज, (Nishanebaaz) हमने पूंजीवाद, साम्यवाद और समाजवाद के बारे में सुना था लेकिन यह भाई-भतीजावाद क्या है? इसकी राजनीति में इतनी चर्चा क्यों होती है?’’ हमने कहा, ‘‘भतीजा जब कोई गुल खिलाता है तो उसका नतीजा चाचा या बुआ को भुगतना ही पड़ता है. बंगाल में मुख्यमंत्री व तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी (Mamata Banerje) के भतीजे व सांसद अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee)के घर सीबीआई धमक पड़ी. इस केंद्रीय एजेंसी ने कोयला तस्करी मामले में अभिषेक की पत्नी व साली के खिलाफ एक्शन लिया. इन दोनों महिलाओं को बुलाकर पूछताछ की गई.’’

    पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, बंगाल विधानसभा का चुनाव सामने रहते ऐसे कदमों के लिए ममता को तैयार रहना चाहिए. ज्यादा से ज्यादा वे चिल्लाएंगी कि ये क्या गजब हुआ, ये क्या जुलुम हुआ!’’ हमने कहा, ‘‘नेताओं को इन बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता. अभिषेक बनर्जी ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) के खिलाफ मानहानि का केस दायर किया तो उनकी पत्नी व साली सीबीआई (CBI) के निशाने पर आ गए. केंद्र सरकार भी किसी की कमजोर कड़ी खोज ही लेती है. इसीलिए शीशे के घर में रहने वालों को दूसरे पर पत्थर नहीं फेंकना चाहिए और हमेशा बत्ती बुझाकर कपड़े बदलने चाहिए.’’ पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, शीशे का घर हो या कमरा, यह भी ध्यान रखना चाहिए कि वहां की चाबी सही-सलामत रहे. ऐसा न होने पर गीत गाने की नौबत आ जाती है- हम तुम एक कमरे में बंद हों और चाबी खो जाए.

    कमरा ठीक से चेक कर लेना चाहिए कि वहां कोई बाहरी व्यक्ति जासूसी करने तो नहीं आ गया है? ऐसे लोगों को चेतावनी देते हुए कहना होगा- आपके कमरे में कोई रहता है, हम नहीं कहते जमाना कहता है.’’ हमने कहा, ‘‘जहां तक रिश्ते की बात है, तमाम मुसीबतें भतीजे ही खड़ी करते हैं. यूपी में शिवपाल यादव को उनके भतीजे अखिलेश यादव ने झटका दिया. अखिलेश मायावती को बुआ कहते थे. यूपी विधानसभा के चुनाव में बुआ-बबुआ दोनों की हार हुई थी. बुआ का हाथी निढाल हो गया और बबुआ की साइकिल पंक्चर हो गई थी. अब भतीजे की कारगुजारी का परिणाम ममता को भुगतना पड़ सकता है. जब ऐसी नौबत आती है तो दिल कहता है- वक्त ने किया क्या हसीं सितम, हम रहे ना हम, तुम रहे ना तुम!’’