विपक्ष में नहीं प्रभावी कांग्रेस पार्टी बनी अंधों का हाथी

पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज (Nishanebaaz), कांग्रेस (Congress) की हालत अंधों के हाथी जैसी हो गई है. अंधे हाथी को टटोलकर अपनी राय देते चले जाते हैं. एक अंधा हाथी का पेट छूकर कहता है- यह मजबूत खंभा है. तीसरा हाथी की सूंड छूकर उसे सांप बताता है. ऐसी ही दृष्टिकोण भिन्नता कांग्रेस नेताओं की भी है. कपिल सिब्बल (Kapil sibal) वकील हैं जो जानते हैं कि कुछ कानून इफेक्टिव रहते हैं और कुछ कानून समय के साथ महत्व खोकर प्रभावहील हो जाते हैं. उन्होंने कहा कि कांग्रेस प्रभावी विपक्ष नहीं रही. यह वैसी ही बात हो गई जैसे कि एक्सपायरी डेट बीत जाने पर कोई दवा प्रभावकारी नहीं रह जाती.

दूसरी ओर गुलामनबी आजाद (Ghulam nabi azad) ने कहा कि कांग्रेस के नेताओं में फाइव स्टार संस्कृति है. उन्हें चुनाव में पार्टी टिकट मिल गया तो फाइव स्टार में जाकर तुक हो जाते हैं. हमने कहा, ‘‘हर नेता का अपना नजरिया होता है. जब तक कांग्रेस सत्ता में थी सबके मुंह बंद थे. पार्टी पावर में नहीं रही तो ये लोग बरसाती मेंढकों के समान टर्र-टर्र करने लगे. असंतुष्ट नेता सत्ताविहीन होने से छटपटा रहे हैं और सोनिया व राहुल से नाउम्मीद होते चले जा रहे हैं. कपिल सिब्बल को कांग्रेस का केस सबल या मजबूत बनाना चाहिए. पार्टी को च्यवनप्राश स्पेशल या मृत संजीवनी सुरा का सेवन कराएं और उसे पुष्टि प्रदान करें ताकि वह असरदार बन जाए.’’ पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, सिब्बल ने यह भी कहा कि पार्टी संगठन को मजबूत बनाने का प्रयास ही नहीं किया जा रहा है.

इस पर आपकी क्या राय है?’’ हमने कहा, ‘‘कांग्रेस हमेशा से नेताओं वाली पार्टी रही है. उसके पास कभी भी आरएसएस जैसा अनुशासन कैडर नहीं रहा. चुनाव के वक्त हर वर्ग के लोग अपना मतलब देखकर उसके साथ जुड़ते रहे. वह अपनी भीड़तंत्र वाली छत्रछाया में सज्जन-दुर्जन, ईमानदार, भ्रष्ट, बुद्धिजीवी- अंगूठाछाप सभी को बगैर भेदभाव स्थान देती रही. बीजेपी को मोदी जैसा नेता मिलने से उसके भाग्य खुल गए वर्ना देश में  घूम फिर कर पुन: कांग्रेस सत्ता में आ जाती थी. जब तक मोदी सत्ता में हैं, केंद्र में कांग्रेस के लिए कोई चान्स नहीं है. इस 135 वर्ष पुरानी पार्टी के लिए आराम करना ही अच्छा है. पांडव 12 वर्ष वनवास में रहे थे, कांग्रेस तो सिर्फ 6 वर्षों से केंद्र की सत्ता से बाहर है. इतना अधीर होने की क्या जरूरत है.’’