कौन पराए, कौन अपने डोनाल्ड ट्रम्प के हसीन सपने

पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज (Nishanebaaz), एक जमाने में टीवी सीरियल मुंगेरीलाल के हसीन सपने काफी लोकप्रिय हुआ था लेकिन अब तो अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में पराजित हो चुके डोनाल्ड ट्रम्प (Donald trump) ने अभी से 2024 के चुनावों के लिए इस पद की उम्मीदवारी पेश कर दी है. इस पर आपकी क्या राय है?’’ हमने कहा, ‘‘हर इंसान को सपने देखने का हक है. सपने भी हमेशा बड़े देखने चाहिए क्योंकि भारत के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम (APJ Abdul Kalam) ने कहा था कि तुच्छ सपने देखना पाप है. थिंक बिग, ड्रीम बिग एंड एक्ट बिग (बड़ी बात सोचो, बड़े सपने देखो और बड़ा कार्य कर जाओ.)

ट्रम्प भी खुद को अमेरिका की राजनीति का ट्रम्प कार्ड मानते हैं. अभी हारे तो क्या, 2024 में फिर किस्मत आजमाएंगे! उन्हें लगता है कि जब क्लिंटन और ओबामा 2 टर्म राष्ट्रपति रहे तो वे भी एक टर्म और हासिल कर लें.’’ पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, ट्रम्प एक सनकी राष्ट्रपति रहे हैं. अमेरिका के प्रेस से उन्होंने पंगा ले लिया था. उन्होंने गोरे अमेरिकियों को नौकरियां दिलवाने के लिए भारतीयों के वर्क वीजा पर रोक लगाई थी. उन्होंने कोरोना के इलाज के लिए भारत से हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा मांगी थी और धमकी दी थी कि यदि दवा नहीं दी गई तो वे भारत को देख लेंगे. उन्होंने भारत से आयात पर टैरिफ बढ़ाया था और हार्ले डेविडसन मोटरसाइकिल पर ड्यूटी लगाने से भारत पर नाराज हो गए थे.’’ हमने कहा, ‘‘यह सब बातें छोड़िए. ट्रम्प और मोदी की बेमिसाल दोस्ती पर गौर कीजिए. अमेरिका के ह्यूस्टन में ‘हाउडी मोदी’ प्रोग्राम में ट्रम्प शामिल हुए थे और मोदी का हाथ थामे पूरे स्टेडियम में घूमे थे.

मोदी ने भी अहमदाबाद के मोटेरा स्टेडियम में ‘नमस्ते ट्रम्प’ (Namaste trump) कार्यक्रम आयोजित करवाया था. दोनों नेताओं की आपस में ट्यूनिंग अच्छी है. 2024 में मोदी के सामने लोकसभा चुनाव की चुनौती होगी तो ट्रम्प भी उसी वर्ष राष्ट्रपति चुनाव लड़ेंगे.’’ पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, तब तक ट्रम्प काफी बूढ़े हो जाएंगे. तब उनकी रिपब्लिकन पार्टी किसी अन्य नेता को राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी दे सकती है. हारे हुए घोड़े पर कौन दांव लगाता है?’’ पड़ोसी ने कहा, ‘‘रिचर्ड निक्सन को जॉन केनेडी ने हराया था लेकिन बाद के चुनाव में निक्सन विजय हासिल कर राष्ट्रपति बने थे. ट्रम्प आगे की सोचकर सपना देख रहे हैं तो देखने दीजिए. अगर यह शेखचिल्ली का ख्वाब है तो पूरा होने से रहा. जिसके सपने पूरे नहीं होते, वह कहता है- रात ने क्या-क्या ख्वाब दिखाए, रंग भरे सौ जाल बिछाए, आंखें खुलीं तो सपने टूटे, रह गए गम के काले साए!’’