नहीं जम पाया सत्ता का तंत्र मोदी ने नहीं सिखाया ट्रम्प को गुरुमंत्र

पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज (Nishanebaaz) अब तो ताश खेलते समय किसी को यह कहकर भी नहीं धमकाया जा सकता कि संभल कर चाल चलना, मेरे पास ट्रम्प कार्ड (Donald trump)है!’’ हमने कहा, ‘‘आप यह सब हमें क्यों बता रहे हैं? आपको दिमाग का ही खेल खेलना है तो ताश की बजाय शतरंज खेलिए. हमारे तमाम नेता राजनीति की बिसात पर शतरंज खेलने में इतने माहिर हैं कि दुनिया के लीडर उनकी बराबरी नहीं कर सकते.

हमारे प्रधानमंत्री मोदी (Narendra modi) ने अपने मित्र ट्रम्प को कोई शतरंजी चाल सिखाई होती तो वह अमेरिका में हो रही दुर्गति से बच जाते. ‘हाउडी मोदी’ और ‘नमस्ते ट्रम्प’ (Namaste Trump) जैसे इवेंट में भी मोदी ने ट्रम्प के कान में सत्ता में टिके रहने का कोई गुरुमंत्र नहीं फूंका. यदि ऐसा होता तो मोदी के ‘मन की बात’ के समान ट्रम्प भी ‘माय हार्ट स्पीक्स’ या ‘इनर वायस आफ माय सोल’ जैसा भाषण समय-समय पर देते रहते. मोदी ने बंगाल का चुनाव देखते हुए गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर जैसी दाढ़ी बढ़ाई तो ट्रम्प को भी सिखा देते कि वे अमेरिका के महान राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन जैसी दाढ़ी बढ़ा लेते.’’ पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, बिना मांगे किसी को ज्ञान नहीं बांटना चाहिए. ट्रम्प को उनकी हेकड़ी ले डूबी. हमारे किसी भी पार्टी के नेता से ट्रम्प बहुत कुछ सीख सकते थे. भारतीय नेता उन्हें बताते कि ऑपरेशन लोटस कैसे चलाया जाता है.

विपक्षी पार्टी के विधायकों को कैसे तोड़ा जाता है. ट्रम्प के पास पैसा था लेकिन हमारे नेताओं जैसी स्पेशल अक्ल नहीं थी. उन्हें विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों को कई मिलियन डॉलर और ऊंचे पदों का लालच देकर अपने पाले में लाना चाहिए था. उन्हें अपने एयरफोर्स वन प्लेन से ले जाकर किसी रिसोर्ट या फाइव स्टार होटल में भोग-विलास के साधनों के साथ ठहराना था.’’ हमने कहा, ‘‘अमेरिका में ऐसे फालतू धंधे नहीं चलते. वहां मध्यप्रदेश, राजस्थान, बिहार या कर्नाटक जैसा नाटक नहीं चलता. अमेरिका में कोई भी डेमोक्रेटिक या रिपब्लिकन अपनी पार्टी नहीं छोड़ता.

वहां दलबदल करने और बेमेल गठबंधन बनाने का रिवाज नहीं है.’’ पड़ोसी ने कहा, ‘‘तब तो अमेरिका के नेताओं को कुछ भी दांवपेंच नहीं आते. ट्रम्प यदि पहले से ही भारत की राजनीति की मैनेजमेंट स्टडी करते तो बहुत कुछ सीख सकते थे. वे शरद पवार से सीखते कि हिंदुत्ववादी और सेक्यूलर पार्टियां भी कैसे सत्ता के लिए हाथ मिला सकती हैं. नीतीश कुमार सिखा देते कि अपनी पार्टी की सीटें बहुत कम होने पर कैसे दूसरी पार्टी की गोद में बैठना पड़ता है. ट्रम्प यह भी सीख सकते थे कि संसद में चर्चा किए बगैर बिल कैसे पास किए जाते हैं और जवाबदेही से कैसे बचा जाता है!’’ हमने कहा, ‘‘आप सही कह रहे हैं. अमेरिका के लीडर्स को भारतीय राजनीति के धुरंधरों से ऑनलाइन कोचिंग लेनी चाहिए. वे बड़े फायदे में रहेंगे.’’