Nishanebaj

    पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज, ऐसे शरारती लोगों को चुल्लू भर पानी में डूबकर मर जाना चाहिए जो किसी जीवित व्यक्ति के मरने की झूठी खबर फैलाते हैं. पता नहीं, उन्हें ऐसी ओछी हरकत करने में क्या मजा आता है. ऐसे तत्वों ने कोरोना संकट के दौर में लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष सुमित्रा महाजन के निधन की अफवाह फैला दी. यह खबर पूरे देश में फैल गई.’’ हमने कहा, ‘‘यह बेसिर-पैर की बात आखिर किसने उड़ाई और इसमें किसी का क्या स्वार्थ रहा होगा?’’ 

    पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, पुलिस तो साइबर जांच के जरिए पता लगाने की कोशिश करेगी कि इस अफवाह की शुरुआत आखिर किस व्यक्ति ने की थी. वैसे कांग्रेस नेता शशि थरूर और कुछ मीडिया संगठनों ने महाजन के निधन की जानकारी दी थी. बाद में थरूर ने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया. उन्होंने कहा कि किसी विश्वसनीय सूत्र से उन्हें यह जानकारी मिली थी लेकिन अब सुमित्रा महाजन के स्वस्थ होने की बात सुनकर वे खुश हैं. इस तरह की खबरें बनानेवालों पर उन्हें ताज्जुब होता है.’’

    हमने कहा, ‘‘गलती शशि थरूर की भी है. उन्हें ट्वीट करने के पहले खबर की सत्यता परख लेनी चाहिए थी. जब सोशल मीडिया नहीं था उस जमाने में भी ऐसा हुआ था. जब लोकनायक जयप्रकाश नारायण मुंबई के अस्पताल में भर्ती थे तभी अभिनेता दिलीपकुमार ने कहा था कि जेपी का इंतकाल हो गया. जब यह बात झूठी साबित हुई तो दिलीप ने सफाई दी कि मुझसे एयरपोर्ट पर किसी ने ऐसा कहा था.’’

    पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, एक पुराना अंधविश्वास है कि किसी के मरने की झूठी खबर फैलने से उस व्यक्ति की आयु बढ़ जाती है. कभी किसी के सिर या कंधे पर धोखे से आकर कोई कौआ बैठ जाए तो उस व्यक्ति के कुशल मंगल के लिए सारे परिचितों को उसकी मौत की झूठी खबर वाला पत्र लिख दिया जाता था. यह एक तरह का टोटका था.’’ हमने कहा, ‘‘यह टोटके का नहीं, शरारत का मामला है जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता.’’