8 months of heavy corona, the epidemic started to decrease, now it's unlocked

पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज, महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने कहा है कि अब राज्य के सामने लॉकडाउन जैसा कोई मुद्दा नहीं रह गया.

पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज, महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने कहा है कि अब राज्य के सामने लॉकडाउन जैसा कोई मुद्दा नहीं रह गया. इंसान के चेहरे के अलावा सब कुछ खुल जाएगा और नवंबर माह में समूचा राज्य अनलॉक हो जाएगा. हेल्थ मिनिस्टर की इस घोषणा के बाद खुश रहिए, मुस्कुराइए और लॉकडाउन को भूल जाइए.’’ हमने कहा, ‘‘सचमुच यह जनता को राहत देनेवाली बात है. लोग उस समय की आतुरता से प्रतीक्षा कर रहे हैं जब स्कूल, कालेज, धार्मिक स्थल और जिम खुल जाएंगे. कितना बड़ा विरोधाभास था कि सरकार ने मदिरालय तो खोल दिए थे लेकिन मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा और चर्च बंद थे. भक्त प्रभु के दर्शनों के लिए तरस रहे थे. अब बेकरार होकर कुछ दिन इंतजार कीजिए. फिर आप आजादी महसूस करेंगे.’’ पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, यह मत भूलिए कि आजादी का मतलब मनमानी बिल्कुल नहीं है. मास्क, सैनिटाइजर और 2 मीटर की सोशल डिस्टेंसिंग आपके जीवन का अंग बने रहेंगे. बार-बार साबुन से मल-मलकर 20 सेकंड तक हाथ धोते रहिए वरना पछताते हुए हाथ मलने की नौबत आ जाएगी. बहती गंगा में हाथ नहीं धो सकते तो बेसिन के नल के बहते पानी में हाथ धोना मत भूलिएगा.’’ हमने कहा, ‘‘दुनिया का नियम है कि जो ऊपर जाता है वह फिर नीचे भी आता है. एवरेस्ट पर चढ़ा पर्वतारोही भी वहीं टिका नहीं रहता. उतरकर वापस अपनी जगह पर आ जाता है. बड़े-बड़े साम्राज्यों का भी पतन हुआ. कोरोना अपनी बुलंदगी तक गया लेकिन अब वह नीचे उतरेगा और अपनी औकात में आ जाएगा. आप देख ही रहे हैं कि घटने लगी महामारी, दूर होने लगी जनता की दुश्वारी!’’ पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, हमें तो नहीं लगता कि जीवन और लोक व्यवहार पहले जैसा सामान्य हो जाएगा. लोगों के दिमाग को शक के कीड़े ने काट लिया है. हम किसी के यहां जा नहीं सकते और कोई अपने यहां आया तो लगता है कि क्यों आ गया! अब लोगों के चरित्र पर नहीं, उनमें कोरोना का वायरस होने का शक हो गया है. सामाजिक मेलजोल, सभा-सम्मेलन सभी प्रभावित हुए हैं. सब कुछ मोबाइल या लैपटाप के जरिए वर्चुअल हो रहा है. स्कूल खुला भी तो अभिभावकों को बच्चों को भेजने के बारे में सोचना पड़ेगा. बच्चों को खेलने-कूदने और धक्का-मुक्की करने से कौन रोक सकता है.’’ हमने कहा, ‘‘चिंता मत कीजिए. वक्त के साथ सारी जटिलताएं दूर हो जाएंगी क्योंकि समय होत बलवान!’’