शरारत से कब आएंगे बाज हिंदुस्तान कहने में क्यों है एतराज

पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज (Nishanebaaz), बिहार विधानसभा (Bihar Assembly session) के नवनिर्वाचित सदस्यों की शपथ विधि के दौरान ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम (AIMIM MLA) के विधायक ने उर्दू में शपथ लेते समय हिंदुस्तान बोलने पर आपत्ति जताई और उसकी जगह भारत बोलने पर अड़ गया.’’ हमने कहा, ‘‘एक ही बात है. कोई भारत बोले या हिंदुस्तान कौन सा फर्क पड़ता है. अंग्रेजी में शपथ लेने वाला इंडिया भी बोल सकता है.’’ पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज उर्दू शपथ के प्रारुप में हिंदुस्तान (Hindustan) शब्द ही है और विधायक को हिंदुस्तान कहने पर एतराज था. उसका कहना था कि यह देश सिर्फ हिंदुओं का नहीं है इसलिए वह शपथ में हिंदुस्तान नहीं कहेगा.

इस पर उसके आलोचकों ने कहा कि जब हिंदुस्तान पसंद नहीं है तो वह पाकिस्तान रहने क्यों नहीं चला जाता?’’ हमने कहा, ‘‘ऐसी नादानी करने वाले को तर्क से समझाना चाहिए. बाबर नामा, जहांगीर नामा जैसे एतिहासिक ग्रंथें में इस देश को हिंदुस्तान कहा गया है. अल बरुनी ने भी इसे हिंदुस्तान लिखा है. जिस देश की 80 प्रतिशत से ज्यादा आबादी हिंदुओं की है वह हिंदुस्तान नहीं तो और क्या है?’’ पड़ोसी ने कहा निशानेबाज बहस में पड़कर क्या फायदा. वह विधायक हिंदुस्तान की बजाय भारत कहता है तो इतना भी काफी है. आपको पता ही है कि शकुंतला और दुष्यंत के प्रतापी पुत्र का नाम भरत था. इसी से देश का नाम भारत वर्ष पड़ा है. वैसे भरत बहुत से हुए हैं. भगवान राम के भाई भरत थे. श्रीमद भागवत में जड़भरत की कथा आती है. जैन धर्म में महाराज भरत हुए जिन्होंने राजपाट त्याग दिया था.

इन बाहुबलि भरत की गोमटेश्वर में विशाल मूर्ति है.’’ हमने कहा, ‘‘ये सारी बातें अपनी जगह हैं. असली बात यह है कि हिंदुस्तान शब्द पर एआईएमआईएम के विधायक को आपत्ति क्यों होनी चाहिए. मुहम्मद बिन कासिम के हमले के पहले तो इस देश में केवल हिंदू ही थे. मुगल भी यहां 12वीं सदी में आए. पार्टीशन पर जोर देने वाले जिन्ना ने कहा था कि हिंदुओं को हिंदुस्तान है तो मुस्लिमों को उनका अलग मुल्क पाकिस्तान मिलना चाहिए. अंग्रेज जाते-जाते देश के 2 टुकड़े कर गए. वाइसराय लार्ड माउंटवेटन ने पहले लाहौर जाकर 14 अगस्त 1947 को जिन्ना को पाकिस्तान के कायदे आजम की शपथ दिलाई और फिर 15 अगस्त को भारत को आजादी दी.’’ पड़ोसी ने कहा, औवैसी की पार्टी के उस विधायक को मालूम होना चाहिए कि अल्लामा इकबाल ने भी इस देश को हिंदुस्तान ही कहा था. उन्होंने तराना लिखा था- सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा, हम बुलबुले हैं इसकी ये गुलिस्तां हमारा, मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर करना, हिंदी हैं, वतन है हिंदोस्तां हमारा!’’