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‘निशानेबाज, आप व्यर्थ की बहस करते हैं. यह समझते क्यों नहीं कि नेहरू, शास्त्री, इंदिरा, मोरारजी देसाई, चरणसिंह, वीपी सिंह, राजीव गांधी, चंद्रशेखर, नरसिंहराव, अटल बिहारी वाजपेयी, मनमोहन सिंह जैसे पूर्व प्रधानमंत्री भारत को आत्मनिर्भर नहीं बना पाए.

पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 20 लाख करोड़ रुपए के ‘आत्मनिर्भर भारत’ पैकेज पर अपनी मुहर लगा दी. सचमुच कितनी खुशी की बात है कि हम अब किसी पर आश्रित नहीं रहेंगे और अपने पैरों पर खड़े हो जाएंगे!’’ हमने कहा, ‘‘अब तक क्या आप दूसरों के पैरों पर खड़े थे? हमें तो नहीं लगता कि आजादी के 70 वर्षों में भारत पूरी तरह बेसहारा था. हमने बड़े बांध बनाए, इस्पात कारखाने खड़े किए. चंद्रयान और मंगलयान अपने बलबूते छोड़ा. कितने ही देशों के उपग्रह हमारा इसरो श्रीहरिकोटा से अंतरिक्ष की कक्षा में सफलतापूर्वक प्रक्षेपित करता है. हमारे वैज्ञानिक, चिकित्सक और आईटी विशेषज्ञ दुनिया के देशों में जाकर अपना हुनर दिखा रहे हैं. अमेरिका और ब्रिटेन की स्वास्थ्य सेवा में अधिकांश डाक्टर भारतीय ही हैं, फिर भारत परावलंबी कैसे हुआ?’’ पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, आप व्यर्थ की बहस करते हैं. यह समझते क्यों नहीं कि नेहरू, शास्त्री, इंदिरा, मोरारजी देसाई, चरणसिंह, वीपी सिंह, राजीव गांधी, चंद्रशेखर, नरसिंहराव, अटल बिहारी वाजपेयी, मनमोहन सिंह जैसे पूर्व प्रधानमंत्री भारत को आत्मनिर्भर नहीं बना पाए. इस देश को यदि किसी ने आत्मनिर्भर बनाया तो प्रधानमंत्री मोदी ने! उन्होंने जादू की छड़ी घुमाकर पिटारे से 20 लाख करोड़ रुपए का पैकेज निकाला तो देश को आत्मनिर्भर बनने का टॉनिक मिल गया. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने निर्मल मन से किश्तों में इस पैकेज के बारे में समझा दिया.’’ हमने कहा, ‘‘हमारा किसानों, मजदूरों और कारीगरों का देश कभी दूसरों पर निर्भर नहीं रहा. जब 2 शताब्दी पूर्व अंग्रेज भारत में आए थे तब समूचे विश्व की अर्थव्यवस्था में 23 प्रतिशत हिस्सा भारत का था. भारत के कोयले और कपास से मैन्चेस्टर की कपड़ा मिलें चलती थीं.’’ पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, पुरानी बातें छोड़कर वर्तमान पर ध्यान दीजिए. कोरोना संकट से निपटने के लिए लंबे समय से जारी लॉकडाउन की वजह से ध्वस्त हो रही अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए प्रधानमंत्री ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ पैकेज दिया है. उद्योग चलाने वालों को 3 लाख करोड़ रुपए की मंजूरी दी गई है. 8 करोड़ प्रवासी मजदूरों को 2 माह निशुल्क अनाज दिया जाएगा.’’ हमने कहा, ‘‘नौकरीपेशा मिडिल क्लास के लिए क्या दिया गया? उस पर तो कहीं ध्यान ही नहीं है. उस पर तो वेतन कटौती की गाज गिरी है. मध्यमवर्गीय तो शुरू से आत्मनिर्भर है, सरकार के भरोसे तो अमीर और गरीब हैं.’’ पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, कोई किसी को आत्मनिर्भर बनने से नहीं रोक सकता. इसके लिए उत्साह और पहलकदमी चाहिए. आत्मनिर्भरता से हमें एक पुरानी कहावत याद आ गई- मां का डर, न बाप का डर, बन गया बेटा वालंटियर!’’