तय करेगा जनमन क्या चुनाव से आएगा परिवर्तन

    पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज, (Nishanebaaz) क्या विधानसभा चुनावों (Assembly Elections) से सत्ता परिवर्तन का दौर आयेगा? क्या जनता इस बार पलटकर रोटी सेकेंगी? एंटी इनकम्बेंसी के बारे में आपकी क्या राय है?’’ हमने कहा, ‘‘आप इनकम्बेंसी की बजाय इनकम की फिक्र कीजिए. कोरोना संकट (Corona Crisis) में जान और जॉब दोनों ही बचना जरूरी है. जान बचाना हो तो जैब अर्थात वैक्सीन लेना जरूरी है.’’ पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, बंगाल की चुनाव रैलियों में उमड़ती भीड़ तो यही दिखाती है कि वहां किसी को कोरोना का डर ही नहीं है.

    अब आप यह बताइए कि क्या बंगाल में ‘पोरिबोर्तोन’ आकर रहेगा?’’ हमने कहा, ‘‘कोई जरूरी नहीं है कि हर चुनाव अपने साथ सत्ता में बदलाव या परिवर्तन लेकर आए? 2019 के आम चुनाव में बीजेपी केंद्र में पुन: भारी बहुमत से चुनकर आई. 2017 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी यूपी, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और मणिपुर में फिर से निर्वाचित हुई. कोई परिवर्तन नहीं हुआ. 2020 में दिल्ली में आम आदमी पार्टी पुन: निर्वाचित हुई. बिहार में भी नीतीशकुमार फिर मुख्यमंत्री बने. ओडिशा में नवीन पटनायक को कोई नहीं हिला पाया. असम में भी बीजेपी की सत्ता कायम रहने के आसार हैं.’’ पड़ोसी ने कहा, ‘‘क्या आप यह कहना चाहते हैं कि ममता बनर्जी भी अपनी सत्ता कायम रख पाएंगी और बीजेपी उनका पत्ता नहीं काट पाएगी?’’

    हमने कहा, ‘‘मुकाबला तगड़ा रहेगा. बंगाल में कुछ भी हो सकता है. घायल शेरनी ममता को चुनौती उन लोगों से है जो टीएमसी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए हैं.’’ पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, ममता बनर्जी जिस तरह बौखला रही हैं, उससे पता चलता है कि उन्हें अपनी जमीन खिसकती नजर आ रही है.’’ हमने कहा, ‘‘महाराष्ट्र में बीजेपी की अधिक सीटें होने के बावजूद 3 पार्टियों ने आघाड़ी सरकार बनाई, वैसे ही टीएमसी की सीट कम हुई तो ममता भी गैर बीजेपी पार्टियों के साथ गठबंधन सरकार बनाएंगी. चुनाव के बाद भी तो गठजोड़ हुआ करते हैं.’