महंगाई ने किया खल्लास परेशान हो गया मिडल क्लास

    पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज, (Nishanebaaz)  इस महंगाई (Inflation) में मिडल क्लास लोगों के बुरे हाल हो गए हैं. वे समझ नहीं पा रहे कि क्या धोएं और क्या निचोड़ें! जब घर का बजट चौपट हो जाए तो इंसान कर भी क्या सकता है?’’ हमने कहा, ‘‘मिडल का बड़ा महत्व है. राजनीति में आपको कितने ही मिडलमैन या सत्ता के दलाल मिलेंगे. फुटबाल में मिड फील्डर होता है तो क्रिकेट में मिडआन, मिडआफ और मिडविकेट होता है. आधी रात को मिडनाइट कहते हैं. बीच वाली उंगली को मिडल फिंगर कहा जाता है. 60 से 72 किलो वजन वाले मुक्केबाज को मिडल वेट बाक्सर कहते हैं. मझौले कद का आदमी मिडल साइज मैन कहा जाता है. आदि और अंत के बीच में मध्य या मिडल रहता है.

    इतिहास में 1000 से 1400 एडी का समय मध्ययुग या मिडल एज कहलाता है. जब चुनाव समय के पूर्व लिए जाते हैं तो इसे मिडटर्म पोल या मध्यावधि चुनाव कहा जाता है. मध्य ग्रीष्मकाल मिड समर कहलाता है. छमाही को मिड ईयर कहते हैं. मध्य जलधारा मिड स्ट्रीम कहलाती है.’’ पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, शब्दजाल मत बुनिए, उस मध्यम वर्ग की फिक्र कीजिए जो रहन-सहन में अमीरों या उच्च वर्ग की नकल करना चाहता है, अपना स्टैंडर्ड बढ़ाने के लिए सजग रहता है लेकिन बढ़ती महंगाई उसके अरमानों पर पानी फेर देती है. यह वही मिडल क्लास है जो टूथपेस्ट को पिचकाकर पूरी तरह यूज कर लेता है और फिर नया पेस्ट खरीदता है. वह तारीख नोट करता है कि पिछली बार बाइक में पेट्रोल कब भराया था और गाड़ी का एवरेज चेक करता रहता है.

    किफायत बरतता है, मगर शिकायत नहीं करता. ज्यादातर मिडल क्लास (Middle Class) लोग नौकरीपेशा रहते हैं. उनकी मध्यमवर्गीय विचारधारा उन्हें रिटायरमेंट के बाद की चिंता तथा ग्रेच्युटी और प्राविडेंट फंड का गणित जोड़ने के लिए प्रेरित करती है. वे जिंदगी भावनाओं से नहीं, हिसाब से जीते हैं.’’ हमने कहा, ‘‘कम्युनिस्ट लोग मानते थे कि मिडल क्लास के लोग समाज में क्रांति नहीं होने देते. वे मजदूरों और पूंजीपतियों के बीच की जगह घेर लेते हैं. मिडल क्लास का आदमी यथास्थिति को स्वीकार करता है. वह ऐसा बफर है जो टकराव को रोकता है. जब तक भारत और चीन के बीच तिब्बत था, तब तक सीमा सुरक्षित थी. इसलिए मिडल में कुछ न कुछ रहना हमेशा जरूरी है.’’