डगमगाई पेट्रोल की नैया बाप बड़ा न भैया सबसे बड़ा रुपैया

पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज (Nishanebaaz), क्रिकेट खिलाड़ी सेंचुरी मारें या न मारें लेकिन पेट्रोल सीधे शतक बनाने की ओर बढ़ रहा है. यदि दुनिया गोल है तो पेट्रोल के भाव में भी झोल है. देश के मध्यवर्ती शहर नागपुर (Nagpur)में पेट्रोल (Petrol Price) के दाम 91.32 रुपए प्रति लीटर हो गए.’’ हमने कहा, ‘‘शिकवे-शिकायत मत कीजिए. पेट्रोल के बढ़ते दाम आपके दिल में इतनी धुकधुकी पैदा करते हैं तो महात्मा गांधी और आचार्य विनोबा भावे के समान पदयात्रा कीजिए.

जब सरदार वल्लभभाई पटेल (Sardar Vallabh Bhai Patel) बैरिस्टरी की पढ़ाई करने लंदन गए थे तो अपने निवास से यूनिवर्सिटी तक 8 मील पैदल जाते थे. पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री जब छात्र थे तो गंगा तैरकर पार करते और स्कूल जाते थे क्योंकि नाव का किराया देने के लिए उनके पास पैसे नहीं होते थे. इन महापुरुषों ने कभी स्कूटर या बाइक नहीं चलाई.’’ पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, समय के साथ रहन-सहन बदल जाता है. पेट्रोल सामान्य व्यक्ति की जरूरत बन चुका है. शहरों का विस्तार हो जाने से खुद का टू-व्हीलर रखना जरूरी हो गया है. पेट्रोल के बढ़ते दाम जेब पर भारी पड़ रहे हैं.’’ हमने कहा, ‘‘ऐसी बात है तो शर्ट में जेब ही मत रखिए. महंगाई पर आज तक कोई ब्रेक नहीं लगा सका है. सरकार भी आखिर क्या करेगी? अरब देशों ने क्रूड ऑइल का उत्पादन घटा दिया है, इसलिए प्रोडक्शन कम तो दाम ज्यादा!’’ पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, कुछ भी हो, रिफायनरी से 28-30 रुपए लीटर का पेट्रोल ग्राहक तक आते-आते 91 रुपए से ज्यादा का इसलिए हो जाता है क्योंकि केंद्र व राज्य सरकारें इस पर तरह-तरह के टैक्स लगाती हैं.

उपकर या सेस में रियायत देकर जनता को राहत दी जा सकती है.’’ हमने कहा, ‘‘आपको महंगे पेट्रोल से शिकायत है तो ई-वेहिकल अपनाइए. बैटरी वाली कार व स्कूटर भी तो उपलब्ध हैं. ऐसी गाड़ियों से पर्यावरण शुद्ध रहता है. रामायण काल में खर-दूषण और वर्तमान काल में प्रदूषण बड़ी समस्या है. यदि आपको पेट्रोल चलित गाड़ियां ही अच्छी लगती हैं तो महंगाई की शिकायत करने की बजाय अपनी कमाई बढ़ाइए. जब मालदार हो जाएंगे तो सस्ते-महंगे की चर्चा नहीं करेंगे. दौलत कमाकर दौलतराव बन जाइए. याद रखिए कि आज के जमाने में बाप बड़ा न भैया, सबसे बड़ा रुपैया!’’