फिर मुश्किल में लालू अपनी आदतों से बाज नहीं आते

पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज (Nishanebaaz), राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालूप्रसाद यादव (Lalu Prasad) जेल जाकर भी अपनी आदतों से बाज नहीं आते. वे बिहार (Bihar) के मुख्यमंत्री और केंद्रीय रेल मंत्री रहे लेकिन सत्ता के मोह में अब भी जकड़े हुए हैं. उन्होंने बंगला रूपी जेल से फोन कर बीजेपी विधायक ललान पासवान (Lalan Kumar Paswan) को फोन कर विधानसभा अध्यक्ष चुनाव के दौरान अनुपस्थित रहने को कहा और महागठबंधन सरकार बनने पर मंत्री बनाने का लालच दिया. हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के अध्यक्ष जीतनराम मांझी ने कहा कि लालू ने कई लोगों को फोन किया. वो मुझसे भी बात करना चाहते थे लेकिन मैंने बात नहीं की. लालू के इरादे गलत हैं.’’ हमने कहा, ‘‘फोन तो बातचीत करने के लिए ही होता है.

लालू ने फोन करके कौन सी गलती की? उनका निर्देश या आफर कोई माने या न माने, उसकी मर्जी!’’ पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज यह सरासर गलत काम है. रांची के जेल प्रशासन और झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार लालू को किस नियम के तहत फोन करने की सुविधा उपलब्ध कराई? इस बात को लेकर बीजेपी नेता अनुरंजन अशोक ने लालू के खिलाफ झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की है और कहा है कि लालू ने जेल से फोन का इस्तेमाल कर सरकार गिराने का काम कर रहे हैं. उनका इस प्रकार फोन करना जेल नियमों का उल्लंघन है.’’ हमने कहा, ‘‘लालू राजनीति के पुराने खिलाड़ी रहे हैं. उनके मन में जो आता है, वह करते हैं. रेल मंत्री रहते हुए उन्होंने बोगी में एक एक्स्ट्रा साइड बर्थ और लगवा दी थी. मिट्टी के सकोरे (ग्लास) में चाय की शुरुआत की थी. मठा कोला और सत्तू का शरबत शुरु कराया था. चारा घोटाले में जेल की सजा काट रहे लालू चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य करार दिए जा चुके हैं पर अब भी उनकी ख्वाहिश है कि उनका राष्ट्रीय जनता दल सत्ता में आ जाए और उनका बेटा तेजस्वी मुख्यमंत्री बन जाए.

पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, आज लालू और नीतीशकुमार एक दूसरे के सख्त खिलाफ हैं लेकिन 1990 में नीतीश ने ही खुद केंद्र में राज्यमंत्री का पद स्वीकार कर लालूप्रसाद यादव का नाम बिहार के सीएम पद के लिए आगे बढ़ाया था. तब बिहार विधानसभा चुनाव में जनता दल 122 सीटें जीत कर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरा था लेकिन उसमें गुटबाजी थी. तब मुख्यमंत्री पद के लिए देवीलाल खेले से लालूप्रसाद और वीपी सिंह खेमे से रामसुंदर दास आमने-सामने थे. चंद्रशेखर ने तीसरे उम्मीदवार के रूप में रघुनाथ झा को उम्मीदवार बनाया था. तब नीतीशकुमार की मदद से लालू मुख्यमंत्री बने थे हालांकि तत्कालीन  राज्यपाल सूनुस सलीम ने लालू को सीएम पद की शपथ दिलाने में 1 सप्ताह से अधिक का समय लगा दिया था. जब देवीलाल खेमे ने राजभवन घेरने की धमकी दी उसके बाद ही 10 मार्च 1991 को लालू का शपथ ग्रहण संभव हुआ.