इतनी जल्दी हार गए हौसला रजनीकांत का राजनीति छोड़ने का फैसला

    पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज, दक्षिण भारत के सुपर स्टार रजनीकांत ने राजनीति छोड़ने का फैसला करते हुए अपनी पार्टी रजनी मक्कल मंदरम को भंग कर दिया है. उन्होंने कहा कि परिस्थितियों के कारण हमने जो सोचा था, वह फलीभूत नहीं हुआ.’’ हमने कहा, ‘‘सब कुछ इतनी जल्दी फलीभूत नहीं होता. आज बीज बोने पर वर्षों इंतजार के बाद फल मिलते हैं. राजनीति में भी धैर्य रखकर आगे बढ़ना पड़ता है. रजनीकांत के सामने दक्षिण भारत के उन सारे नेताओं की मिसाल थी जो अभिनेता से नेता बने.

    एमजी रामचंद्रन, जयललिता, एनटी रामाराव के नक्शेकदम पर चलकर रजनीकांत भी कामयाब हो सकते थे. उनके पास पहले ही इतनी लोकप्रियता का आधार है कि वे अच्छे-अच्छे नेताओं को पीछे छोड़ सकते हैं.’’ पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, रजनीकांत वह करिश्मा कर सकते हैं जो दूसरा कोई नहीं कर सकता. वे किसी गंजे के सिर पर तीली रगड़कर सिगरेट सुलगा लेते हैं. उनकी फाइट देखने लायक रहती है. अपनी फिल्म ‘रोबोट’ में तो उन्होंने कमाल ही कर दिया था! ‘शिवाजी द बॉस’ नामक फिल्म में वे भ्रष्टाचारियों पर टूट पड़े थे. यदि रजनीकांत राजनीति में सक्रियता दिखाते तो सारा माहौल सुधारकर रख देते.’’ हमने कहा, ‘‘पर्दे पर अभिनय अलग बात है. राजनीति में आने पर अभिनेताओं को पता चल जाता है कि एक्टिंग में नेता उनके भी बाप हैं! लालूप्रसाद यादव जानबूझकर अपने किस्म का देहाती अंदाज दिखाया करते थे.

    गुलाम नबी आजाद के राज्यसभा से रिटायर होने पर प्रधानमंत्री मोदी की आंखों में आंसू उमड़ आए थे. राजनीति में आए फिल्मी सितारों की बात करें तो अमिताभ बच्चन इलाहाबाद से लोकसभा में चुने गए थे. हेमवती नंदन बहुगुणा को हराने के लिए कांग्रेस ने उन्हें मोहरा बनाया था. बीजेपी के राम नाईक को हराने के लिए कांग्रेस ने गोविंदा का इस्तेमाल किया था. फिल्म नायक में अनिल कपूर ने 1 दिन का सीएम बनकर कमाल दिखाया था. लेकिन यह सब परदे पर ही होता है, राजनीति में घाघ लोग ही चलते हैं. रजनीकांत पहले ही समझ गए कि वे फिल्मों में ही ठीक हैं. राजनीति के अंगने में उनका कोई काम नहीं है.’’