इनके कर्म थे विनाशी यूपी के अफसर फिर बने चपरासी

पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज (Nishanebaaz), यूपी की योगी सरकार(UP Government) ने नियम तोड़कर प्रमोशन पाने वाले 4 अधिकारियों को फिर से चपरासी (Four Officers Demoted as Peon) बना दिया. न जाने इन लोगों के दिलों पर क्या बीत रही होगी! वे सोच रहे होंगे- वक्त ने किया क्या हसीं सितम, हम रहे ना हम, तुम रहे ना तुम!’’ हमने कहा, ‘‘जिस तरह जहाज पर बैठा पंछी इधर-उधर उड़ान भरकर फिर से जहाज पर वापस आ जाता है, वैसे ही इन अयोग्य लोगों की दशा हुई. वे अपनी पूर्व स्थिति में लौट आए.

ऐसे लोगों को समझ लेना चाहिए कि समय से पहले और किस्मत से ज्यादा किसी को नहीं मिलता. ये लोग बेरोजगार तो नहीं हुए, सिर्फ अपने पूर्व पदों पर लौटे हैं. इसके संबंध में कहावत है- ‘पुन: मूषको भव:’ अर्थात फिर से चूहे बन जाओ. इस बारे में कथा है कि एक चूहे पर कोई तपस्वी प्रसन्न हो गए. उन्होंने उससे मनचाहा वर मांगने को कहा. इस पर चूहे ने कहा कि मैं अपने हाल से दुखी हूं. मुझे हर समय बिल्ली से डर लगा रहता है. इस पर तपस्वी ने चूहे को बिल्ली बना दिया. तभी बादल कड़का और बिल्ली डर गई. तब उसने कहा कि अब मुझे बादल बना दो. बादल बनने के बाद उसने पहाड़ से टक्कर ली जो वर्षा के पानी के रूप में बदल गया. तब उसने कहा कि बादल से शक्तिशाली पहाड़ है. तपस्वी ने कहा कि कहो तो तुझे पहाड़ बना दूं. इस पर चूहे को याद आया कि वह खुद ही पहाड़ को कुतर कर अपना बिल बनाता था.

इसलिए पहाड़ भी शक्तिशाली नहीं है. उसने कहा कि आप मुझे फिर से चूहा बना दीजिए. जिस तरह चूहा अपने मूल रूप में लौट आया, वैसे ही यह अफसर भी फिर से अपने चपरासी के मूलरूप में वापस आ गए हैं.’’ पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, इससे तो ये लोग नुकसान में रहे. सांप-सीढ़ी के खेल के समान सीढ़ी से ऊपर चढ़े और सांप के मुंह में जाकर फिर नीचे आ गए. पहले उन्नति की थी, बाद में अवनति हो गई. उन्होंने तिकड़मबाजी और रिश्वत से किया ऊंचा पद पाने का जतन लेकिन उत्थान के बाद हो गया उनका पतन. ऊंचाई पर उड़ान भरती इनकी पतंग कट गई.’’

हमने कहा, ‘‘यह भाग्य का खेल है. भगवान कृष्ण ने गीता में कहा है- सुख-दुख समे कृत्वा! सुख-दुख दोनों को समान मानो और स्थितप्रज्ञ बनो. चपरासी अफसर बन गया तो जिम्मेदारियां आ गई थीं. अब वापस चपरासी बनने में कोई टेंशन नहीं है. साहब को चाय-पानी पिलाने और फाइल एक टेबल से दूसरे पर ले जाने में ड्यूटी पूरी हो जाती है. हिंदी में कहा गया है- जाही विधि राखे राम, ताही विधि रहिए. मराठी में भी समझाया गया है- ठेविले अनंत तैसेचि रहावे, चित्ती असो द्यावे समाधान! जैसा प्रभु ने रखा है, उसी में संतोष के साथ रहो.’’