कोई क्या करे जनाब, भैंसों ने पी शराब, जमाना है खराब

    पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज, क्या जमाना आ गया है कि अब भैंसों को भी शराब पीने का चस्का लग गया है! महात्मा गांधी के गुजरात में जहां मद्य निषेध होना चाहिए था, वहीं गांधीनगर में भैंसों की शराब पार्टी हुई. हुआ यूं कि भैंसों के बेकाबू होकर कूदने-फांदने और उनके मुंह से झाग आना जारी रहने पर तबेले के मालिक दिनेश ठाकोर, अंबरम ठाकोर व रवि ठाकोर ने पशु चिकित्सक से परामर्श किया. डॉक्टर को शक होने पर उसने तबेले का निरीक्षण किया और कंटेनर के पानी में पीला रंग और उसमें से उठती अजीब गंध के बारे में पूछताछ की तो ठाकोर बंधुओं ने कहा कि कुछ पेड़ की शाखाएं पानी में गिर जाने से पानी का रंग ऐसा हो गया है. 

    डॉक्टर ने पुलिस को सूचना दी, जिसने वहां आकर पानी के कुंड से शराब की कुछ टूटी बोतलों के अलावा व्हिस्की, वोडका जैसी शराब की 101 बोतलें बरामद कीं. जाहिर है कि कुछ बोतलें फूट जाने से शराब पानी में मिल गई होगी, जिसे पीकर भैसों को मस्ती चढ़ गई.’’ हमने कहा, ‘‘कहीं पुलिस के मालखाने में जब्ती की शराब पीकर चूहे उत्पात मचाने लगते हैं तो कहीं भैंस पीने का शौक फरमाती है. आखिर यह सब क्या है!’’ 

    पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, भैंस वैसे भी चर्चा में रहती है. यूपी में अखिलेश यादव की सरकार रहते समय दबंग नेता आजम खान की भैंसें गुम हो गई थीं और राज्य का पुलिस बल सारा काम छोड़कर उन भैंसों की तलाश में सरगर्मी से लग गया था. जब बिहार में लालूप्रसाद यादव मुख्यमंत्री थे तो उनके बंगले में गाय-भैंस बंधी रहती थीं. भैंस को लेकर कहावत है- भैंस के आगे बीन बजाई, वो बैठी पगुराई. किसी को जब बड़ी पारिवारिक जिम्मेदारियों का बोझ उठाना पड़ता है तो वह लोगों के पूछने पर कहता है- भैया, भैंस के सींग भैंस को भारी नहीं लगते!” हमने कहा, ‘‘भैंसा यमराज का वाहन है. बैलगाड़ी के समान छत्तीसगढ़ में भैंसा गाड़ी चला करती है. पहले भैंसे की लड़ाई कराई जाती थी जिसे अब गैरकानूनी घोषित कर दिया गया है.’’