Uttarakhand Fire
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    देहरादून. उत्तराखंड के जंगलों में भड़क रही आग पर काबू पाने के लिए सोमवार को भारतीय वायु सेना के हेलीकॉप्टरों ने प्रभावित क्षेत्रों में पानी का छिड़काव किया। पिछले 24 घंटों में वनाग्नि की 85 और घटनाएं दर्ज की गयीं। आग बुझाने में हेलीकॉप्टर के इस्तेमाल की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने सोशल मीडिया पर इस संबंध में वीडियो भी साझा किए जिसमें भारतीय वायु सेना के एम-आई हेलीकॉप्टर टिहरी झील से पानी लेने के बाद उड़ान भरते दिखाई दे रहे हैं।

    प्रदेश में वनाग्नि की घटनाओं में बढ़ोतरी को देखते हुए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से रविवार को मदद की गुहार लगाई थी जिसके बाद उन्होंने तत्काल दो हेलीकॉप्टर भेज दिए थे।

    प्रदेश को हर संभव मदद का आश्वासन देते हुए शाह ने कहा था कि जरूरत पड़ने पर राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की टीमें भी प्रदेश को दी जाएंगी। हेलीकॉप्टर के जरिए आग बुझाने की शुरू की गई कवायद के प्रारंभिक चरण में सोमवार को गढ़वाल क्षेत्र के टिहरी जिले के नरेंद्रनगर वन प्रभाग की नरेन्द्रनगर रेंज के तहत अदवाणी और तमियार के जंगलों में आग बुझाई गई।

    मुख्यमंत्री और वन मंत्री हरक सिंह रावत की निगरानी तथा मुख्य वन संरक्षक (गढ़वाल) एस के पटनायक के समन्वय में सुबह 10 बजे शुरू हुए आग बुझाने के इस अभियान के दौरान हेलीकॉप्टर चालक दल के साथ नरेंद्र नगर के प्रभागीय वनाधिकारी धर्म सिंह मीणा भी मौजूद रहे । टिहरी झील से 5,000 लीटर की बाल्टी में पानी भरकर प्रभावित जंगलों में करीब 10,000 लीटर पानी का छिड़काव कर वनाग्नि को नियंत्रित किया गया।

    यह अभियान दोपहर तक जारी रहा लेकिन बाद में प्रतिकूल मौसम के कारण इसे रोकना पड़ा। मंगलवार प्रातः दोबारा इसे शुरू किया जाएगा । उधर, उत्तराखंड के कुमाऊँ क्षेत्र में दृश्यता कम होने के कारण वनाग्नि शमन कार्य हेलीकॉप्टर के जरिये नहीं किया जा सका। कुमाऊं मण्डल की मुख्य वन संरक्षक तेजस्विनी पाटिल धकाते ने बताया कि वातावरण में धुएँ का घनत्व बहुत था और इस कारण हेलीकॉप्टर को उड़ान भरने के लिए जरूरी दृश्यता नहीं मिली। वन विभाग के आंकडों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में प्रदेश में 85 और वनाग्नि की घटनाएं दर्ज की गयीं जिनमें 165.45 हेक्टेअर जंगल जलकर खाक हो गया । (एजेंसी)