Puja Bharti

पटना (Patna). आज के दौर में हर कोई अच्छा पढ़-लिखकर डॉक्टर, इंजीनियर या कोई सरकारी नौकरी कर लाखों-करोड़ों के पैकेज पाकर आराम की जिंदगी जीना चाहता है। लेकिन बहुत कम ऐसे लोग हैं जो किसान बनाना चाहते हैं। विपरीत इसके, कई ऐसे लोग भी हैं, जो अपनी अच्छी-खासी नौकरी छोड़कर खेती करने में जुट गए हैं। ऐसी ही कहानी बिहार (Bihar) की बेटी पूजा भारती (Puja Bharti) की है। जिन्होंने सरकारी नौकरी छोड़कर कुछ अलग करने की ठानी। पूजा ने गांव में खेती करना शुरू किया और जैविक खेती (Organic Farming) पर जोर दे रही है। जिससे किसानों की जिंदगी बदल रही है।

सरकारी स्कूल से पढाई-लिखाई, आईआईटी (IIT) में एडमिशन

पूजा बिहार के कंचनपुर (Kanchanpur) गांव की रहनेवाली है। उन्होंने गांव के एक सरकारी स्कूल (Government school) से पढ़ाई की। अंग्रेजी विषय का कोई शिक्षक नहीं होने से यह विषय इनके लिए चैलेंज ही बन गया था। इसके बाद उन्हें एक  अच्छे स्कूल में एडमिशन मिल गया। फिर उन्होंने आईआईटी (IIT) के लिए तैयारी शुरू की। क्लियर भी कर गईं। आईआईटी में एडमिशन मिला। लेकिन यहां भी अंग्रेजी ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। पूजा को शुरुआत में क्लास में अंग्रेजी न समझ पाने की वजह से बड़ी दिक्कत होती थी। लेकिन पूजा (Puja) धीरे-धीरे अंग्रेजी समझने लगी और इसमें सवाल-जवाब भी करने लगी।

सरकारी नौकरी की, अमेरिका भी गई

पूजा पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद (sports) में भी शानदार प्रदर्शन कर रही थीं। उन्होंने बास्केटबॉल में अपने कॉलेज का प्रतिनिधित्व किया। इसके बाद उन्हें इंटर्नशिप के लिए उन्हें अमेरिका के वर्जीनिया कॉमनवेल्थ यूनिवर्सिटी (Commonwealth University, Verginia) में जाने का मौका भी मिला।

पूजा पीएचडी भी कर सकती थीं, लेकिन उन्होंने नौकरी करने की ठानी। उन्हें गेल (GAIL) में सरकारी नौकरी मिल गई। इसके बाद उन्होंने छुट्टियां लेकर देशभर के कई गावों (INDIAN VILLAGES) का भ्रमण किया। पूजा थोड़ी-बहुत रिसर्च भी करती थीं। उन्होंने कृषि विशेषज्ञ (Agriculture Engineer) दीपक सचदे से मिलकर खेती से जुड़े हुनर भी सीखे। 

सरकारी नौकरी छोड़ी, बैक टू विलेज प्रोजेक्ट शुरू

खेती से जुड़े हुनर सीखने के बाद पूजा ने अपनी सरकारी नौकरी छोड़ दी। जिसका समूचे परिवार ने विरोध भी किया। सबका कहना यही था कि, पूजा को एक दिन पछताना पड़ेगा। जब पूजा अपने गांव में खेती करती थीं तो आस-पड़ोस के लोग उन्हें खूब टोकते थे। जिससे उन्होंने उड़ीसा में खेती करने की ठानी। पूजा ने अपने बिज़नेस पार्टनर मनीष कुमार (Manish Kumar) के साथ दिसंबर, 2015 में उड़ीसा (Odisha) के मयूरभंज (Mayurbhanj) जिले में अपना काम शुरू किया। इसके बाद उन्होंने 2016 में ‘बैक टू विलेज’ (Back to Village)  नाम से उन्होंने एक प्रोजेक्ट शुरू कर दिया।

खेती के साथ-साथ उन्होंने उड़िया भाषा भी सीख ली। उन्होंने जैविक खेती (Organic Farming) के बारे में लोगों को समझाना शुरू किया और किसानों (Farmers) ने इसे अपनाना भी शुरू कर दिया। जैविक खेती से किसानों को काफी फायदा (profit) होने लगा। किसान इससे खुश भी है।

सफलता

पूजा ने ‘कृषि केंद्र’ (Krishi Kendra) के नाम से मयूरभंज, पुरी और बालेश्वर में 10 जैविक फार्म सेंटर (Organic Farm Center) खोले हैं। मौजूदा समय में सभी सेंटर से लगभग 500 किसान जुड़े हुए हैं। वहीं इस तरीके से 5000 किसान उनसे जुड़कर जैविक खेती को अपना रहे हैं। इस तरीके से इनका प्रोजेक्ट कृषि उद्यमी तैयार करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। पूजा की इस सफलता के लिए देशभर में उनकी काफी तारीफ हो रही है।