झारखंड में कोरोना का कहर, रात 3 बजे तक धधकती रही 76 मृतकों की चिताएं

    ओम प्रकाश मिश्र

    रांची. झारखंड (Jharkhand) में कोरोना (Corona) तेजी से पांव पसार रहा है। संक्रमण की रफ़्तार पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष तेज हो गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बुधवार को राज्य में कोरोना के 15, 343 नए मरीज (New Patients) मिले, वहीँ राजधानी रांची (Ranchi) में मिलने वाले नए मरीजों की संख्या 6, 973 पहुंच गई है। राज्य में कोरोना से 1232 लोगों की मौत (Death) हुई है, जिसमें 315 मृतक सिर्फ रांची से है। रांची में कोरोना के अलावा अन्य बीमारियों से मरने वालों की संख्या अचानक बढ़ गई है। बीती रात, मृतकों की लाशों की अंत्येष्टि के लिए श्मशान घाटों में कतारें लग गयी। श्मशान में जगह की कमी के कारण बाहर सड़कों पर एक साथ 76 शवों की अंत्येष्टि की गयी। 

    झारखंड में कोरोना संक्रमण की भयावहता को देखते हुए उच्च न्यायालय ने सरकार को युद्ध स्तर पर निपटने और सभी जरुरी संसाधन तत्काल उपलब्ध कराने का आदेश दिया है। राज्य में कोरोना से निपटने के लिए किए गए इन्तजामातों को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायलय ने कहा कि राज्य में स्वास्थ्य आपातकाल जैसी स्थिति है। बावजूद इसके राज्य सरकार के इंतजाम काफी नहीं है। सरकार हालात को गंभीरता से ले और कोरोना से निपटने के सारे उपाय सुनिश्चित करें। 

    सदर अस्पताल के लगभग सभी कर्मचारी कोरोना संक्रमित

    राजधानी रांची के सदर अस्पताल का आलम यह है कि यहां के सारे कर्मचारी कोरोना की चपेट में आ गए हैं। सदर अस्पताल की ऐसी स्थिति को देखते हुए झारखंड सरकार ने इस समूचे अस्पताल को अब सिर्फ कोरोना के मरीजों के इलाज के लिए निर्धारित कर दिया है। इस अस्पताल में अब सिर्फ कोरोना के मरीजों का ही इलाज किया जाएगा। राज्य में बुधवार को 12, 836 लोगों की कोरोना जांच की गयी। जिसमे 693 सक्रीय कोरोना संक्रमित पाए गए, जबकि रांची में 351 लोगों के संक्रमित होने की पुष्टि की गयी है। कोरोना के अलावा दूसरे अन्य बीमारियों से मरने वालों की संख्या में बेतहासा वृद्धि होने के बाद बीती रात राजधानी रांची में शवों को जलाने का दृश्य बहुत भयावाह था।मंगलवार से अचानक मृत्यु के आंकड़े बढ़ने के बाद शवदाह गृहों में एंबुलेंस की कतारें लगने लगी और लाशों की संख्या बढ़ने लगी। जगह की कमी को देखते हुए रांची के उपायुक्त ने शवदाह गृहों से बाहर लाशों को जलाने का आदेश दिया गया। परिणाम स्वरुप नामकुम के घाघरा स्थित शमशान घाट में विशेष इन्तेजाम कर एक साथ कतार में 54 लाशों का अंतिम संस्कार किया गया।

    रांची नगर निगम के तीन टीमों की तैनाती

    रांची के उपायुक्त देर रात तीन बजे तक शवों की अंत्येष्टि की निगरानी में वहां उपस्थित रहे। राज्य के स्वास्थ्य सचिव के. के. सोन ने सूबे के सभी उपायुक्तों को 24 घंटे के भीतर कोरोना से मरे लोगों का अंतिम संस्कार कराने का निर्देश दिया है। कोरोना जांच रिपोर्ट के लिए किसी भी परिस्थिति में कोई मृत शरीर को अंतिम संस्कार के लिए लंबित नहीं रखा जाएगा। सचिव ने कहा कि सभी जिलों में मृत शरीर के अंतिम संस्कार के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं पूर्व से ही चिन्हित की जानी चाहिए, ताकि किसी भी परिस्थिति में अंतिम संस्कार के समय कोई बाधा उत्पन्न न हो। शवों के अंतिम संस्कार में व्यवधान न आए इसके लिए रांची नगर निगम ने तीन टीमों की तैनाती श्मशान घाटों पर की गई है। पार्थिव शरीर के अंतिम संस्कार कार्य का निरिक्षण करने के बाद उपायुक्त छवि रंजन ने कहा कि हरमू मुक्तिधाम स्थित विधुत शवदाह गृह ठीक होने तक कोरोना संक्रमण से मृत मरीजों के दाह संस्कार के लिए रांची नगर निगम के सहयोग से वैकल्पिक व्यवस्था घाघरा घाट में जारी रहेगी।

    अस्पताल में कम पड़ रहे हैं बेड

    कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच इस माह के 12 अप्रैल तक 151 शव की अंत्येष्टि रांची के तीनो घाटों पर की गई। इनमे से 76 लाशें कोरोना संक्रमित थी, 12 अप्रैल तक औसतन 17 शव की अंत्येष्टि की गयी है। कोरोना की बढ़ती रफ़्तार ने जहां एक ओर सरकार की चिंता बढ़ा दी है, वहीँ अस्पतालों में मरीजों के लिए बिस्तरों की संख्या कम पड़ने लगी है। हालाँकि फ़िलहाल रांची में लॉकडाउन लगाने जैसी संभावना अभी तक नहीं बनी है, लेकिन म्रत्यु दर में लगातार हो रही वृद्धि ने आम जनता की होश उड़ा दिए हैं। अधिकांश लोग अपनी और अपने परिवार की सलामती के लिए घरों में ही रहने लगे हैं। कोरोना के प्रति आम लोगों में मौत का खौफ गहराने लगा है। इधर, राज्य सरकार ने आम लोगों से आवश्यक काम नहीं होने पर घरों पर ही रहने का अपील करते हुए कहा है कि कोरोना से लड़ने के सारे इन्तेजामात के आदेश सम्बन्धित अधिकारी और पदधिकरियों को दे दिया गया है और सरकार इसमें किसी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं करेगी।