Farooq Abdullah

श्रीनगर. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जम्मू-कश्मीर क्रिकेट संघ (जेकेसीए) में करोड़ों रुपये के घोटाले के सिलसिले में नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला से सोमवार को छह घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की। वहीं, राज्य में मुख्यधारा के अनेक राजनीतिक दलों के नवगठित संगठन पीपल्स अलायंस ने इसे ‘बदले की राजनीति’ बताया।

जेकेसीए के कोष में 40 करोड़ रुपये से अधिक राशि के गबन से संबंधित मामले में जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री अब्दुल्ला (82) से राजबाग में एजेंसी के क्षेत्रीय कार्यालय में पूछताछ की गई। उन्हें 15 अक्टूबर को गुपकर घोषणा के तहत पीपल्स अलायंस के गठन के एक दिन बाद पेशी के लिये समन मिला था।

सीबीआई उनके खिलाफ पहले ही आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है और ईडी मामले में धनशोधन के बिंदु से जांच कर रही है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की पूछताछ के बाद निकले अब्दुल्ला ने संवाददाताओं से कहा कि जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा बहाल करने का उनका संकल्प जारी रहेगा।

उन्होंने मीडिया कर्मियों से कहा, “एक बात याद रखिए, हमें लंबा सफर तय करना है। यह लंबी लड़ाई है।” उन्होंने कहा, “हमारी लड़ाई जारी रहेगी चाहे फारूक अब्दुल्ला जिंदा रहे या उसकी मौत हो जाए…हमारे संकल्प में बदलाव नहीं आया है और हमारे संकल्प में तब भी बदलाव नहीं आएगा जब मुझे फांसी पर भी लटका दिया जाएगा।”

उन्होंने कहा, “यह केवल फारूक अब्दुल्ला या नेशनल कॉन्फ्रेंस की अकेली लड़ाई नहीं है। यह लड़ाई सभी लोगों की है।” ईडी की पूछताछ के बाद खिन्न दिख रहे अब्दुल्ला ने संवाददाताओं से कहा, “मैं चिंतित नहीं हूं। आप क्यों चिंतित हैं? मुझे बस इस बात का अफसोस है कि मैं अपना दोपहर का भोजन नहीं कर सका, क्योंकि इसे मैं साथ नहीं लाया था।” उन्होंने कहा कि ईडी अपना काम कर रही है और वह अपना काम कर रहे हैं।

ईडी अधिकारियों ने कहा कि धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत अब्दुल्ला का बयान दर्ज किया जाएगा। लोकसभा सांसद तथा जेकेसीए के पूर्व अध्यक्ष अब्दुल्ला से इस मामले में पिछले साल जुलाई में भी चंडीगढ़ में पूछताछ की गई थी। उनसे संघ में हुई कथित धोखाधड़ी के समय उनकी भूमिका और उनके द्वारा लिये गए निर्णयों के बारे में पूछताछ की गयी। ईडी ने सीबीआई की प्राथमिकी के आधार पर यह मामला दर्ज किया है।

सीबीआई ने जेकेसीए के महासचिव मोहम्मद सलीम खान और पूर्व कोषाध्यक्ष एहसान अहमद मिर्जा समेत कुछ पूर्व पदाधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। सीबीआई ने 2002 से 2011 के बीच भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (बीसीसीआई) द्वारा खेल को बढ़ावा देने के लिये जेकेसीए को दिये गए अनुदान में से 43.69 करोड़ रुपये के गबन के मामले में अब्दुल्ला, खान, मिर्जा के अलावा मीर मंजूर गजनफर अली, बशीर अहमद मिसगार और गुलजार अहमद बेग (जेकेसीए के पूर्व अकाउंटेंट) के खिलाफ 2018 में आरोप पत्र दाखिल किया था।

ईडी ने कहा कि उसकी जांच में सामने आया है कि जेकेसीए को वित्त वर्षों 2005-2006 और 2011-2012 (दिसंबर 2011 तक) के दौरान तीन अलग-अलग बैंक खातों के जरिये बीसीसीआई से 94.06 करोड़ रुपये मिले। ईडी का आरोप है कि जेकेसीए के नाम पर कई अन्य बैंक खाते खोले गए, फिर उनमें कोष का हस्तांतरण किया गया। इन बैंक खातों और पहले से मौजूद खातों का बाद में जेकेसीए के काले कोष का शोधन करने के लिये इस्तेमाल किया गया।

फारूक अब्दुल्ला के बेटे उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट किया, “यह कुछ और नहीं बल्कि ‘गुपकर घोषणा’ के तहत ‘पीपल्स अलायंस’ के गठन के बाद की जा रही प्रतिशोध की राजनीति है।” अन्य नेताओं ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी है। पीडीपी नेता तथा जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि ईडी द्वारा “फारूक साहब को अचानक तलब किया जाना जम्मू-कश्मीर के मुख्यधारा के राजनीतिक दलों के साथ आने से भारत सरकार की बौखलाहट को दर्शाता है।”

उन्होंने ट्वीट किया, “यह राजनीतिक प्रतिशोध को भी दर्शाता है। इससे अपने अधिकारों के लिये एकजुट होकर लड़ने के हमारे संकल्प पर रत्तीभर भी फर्क नहीं पड़ेगा।” पीपल्स कांफ्रेंस के नेता सज्जाद लोन ने भी कहा कि यह कदम राजनीतिक प्रतिशोध को दर्शाता है। जम्मू कश्मीर में मुख्यधारा के राजनीतिक दलों के हाल ही में बने गठबंधन पीपल्स अलायंस ने अब्दुल्ला से ईडी की पूछताछ की निंदा की और इसे देश में असंतोष तथा असहमति की आवाज को दबाने के लिए केंद्र की ‘बदले की राजनीति’ का हिस्सा बताया।

पीपल्स अलायंस ने एक बयान में कहा कि इस तरह की ‘चालें’ जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा बहाल करने के संगठन के संकल्प को प्रभावित नहीं करेंगी। पूर्ववर्ती राज्य की यथास्थिति बहाल करने की मांग वाली गुपकर घोषणा पर आगे काम करने के लिए 15 अक्टूबर को पीपल्स अलायंस का गठन किया गया था।

अलायंस ने एक बयान में कहा, “गुपकर घोषणा के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सभी क्षेत्रों और समुदायों में लोगों के बीच एकता तथा राष्ट्रीय स्तर पर सिविल सोसायटी संगठनों और राजनीतिक दलों से मिले समर्थन से हतोत्साहित केंद्र सरकार दमन की कार्रवाई कर रही है।”

प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई की निंदा करते हुए संगठन ने कहा कि यह देशभर में असंतोष और असहमति की आवाज दबाने के लिए केंद्र सरकार की ‘बदले की राजनीति’ का हिस्सा है। (एजेंसी)