Mayawati and Upendra Kushwaha

पटना. बिहार में विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) से पहले विपक्षी महागठबंधन में नाराज चल रहे राष्ट्रीय लोकतांत्रिक समता पार्टी (रालोसपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) द्वारा अस्वीकार कर दिए जाने के बाद मंगलवार को मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और जनवादी सोशलिस्ट पार्टी के साथ मिलकर एक नया मोर्चा बनाने की घोषणा की।

पटना में मंगलवार को आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि राज्य के सभी 243 विधानसभा क्षेत्रों में “अबकी बार शिक्षा वाली सरकार” के वादे के साथ मोर्चा बनाया जाएगा, जो राज्य में विकास और रोजगार सृजन के एक नए युग की शुरूआत करेगा।

कुशवाहा ने नीतीश कुमार के 15 साल और पूर्ववर्ती लालू प्रसाद-राबड़ी देवी के डेढ़ दशक के शासन काल को “एक ही सिक्के के दो पहलू” करार देते हुए आरोप लगाया कि दोनों के शासनकाल में न तो भ्रष्टाचार को खत्म करने और न ही स्वास्थ्य एवं शिक्षा में सुधार लाने के लिए कुछ पर्याप्त किया गया।

करीब दो साल पहले लालू प्रसाद की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) से हाथ मिलाने के अपने फैसले का बचाव करते हुए रालोसपा प्रमुख जिन्होंने हाल ही लालू के छोटे पुत्र और उनके राजनीतिक उत्तराधिकारी माने जाने वाले तेजस्वी प्रसाद यादव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था, ने कहा कि वह महागठबंधन में शामिल केंद्र में एक वैकल्पिक सरकार के गठन में मदद करने के लिए हुए थे न कि बिहार में राजद की नयी सरकार बनाने में मदद करने के लिए।

महागठबंधन से असंतुष्ट चल रहे कुशवाहा ने 24 सितंबर को पटना में आयोजित रालोसपा की एक आपात बैठक के दौरान कहा था कि राजद ने जिस नेतृत्व (तेजस्वी प्रसाद यादव) को खड़ा किया है उसके पीछे खडे़ रहकर प्रदेश में परिवर्तन लाना संभव नहीं। उन्होंने कहा था कि सीटों की संख्या (आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन के घटक दलों के बीच सीटों का बंटवारा) का मामला उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण नहीं है।

बिहार की जनता चाहती है कि नेतृत्व ऐसा हो जो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सामने ठीक से खड़ा हो सके। इतनी आकांक्षा और अपेक्षा जरूर थी। आज लोग जो भी सोचें पर अभी भी हमारे मन में है कि राजद अगर तय करे कि वह अपना नेतृत्व बदल देगी तो मैं अपने लोगों को समझा लुंगा।

उल्लेखनीय है कि राजद ने एकतरफा निर्णय लेते हुए बिहार विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता और पार्टी प्रमुख लालू प्रसाद के राजनीतिक उत्तराधिकारी माने जाने वाले तेजस्वी प्रसाद यादव को आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर पेश किया है । यह पूछे जाने पर कि क्या वह महागठबंधन के भीतर इस मुद्दे पर अलग-थलग पड़ गए थे, कुशवाहा ने इससे इंकार करते हुए कहा कि गठबंधन के दूसरे सबसे बड़े घटक कांग्रेस को देखें।

तेजस्वी के सवाल पर वहां अभी भी संशय है। इसके अलावा, हाल ही में जीतन राम मांझी ने भी इसी मुद्दे पर मतभेद के कारण महागठबंधन छोड़ दिया और राजग में चले गए। पटना और नयी दिल्ली में राजग के नेताओं के साथ कथित तौर पर बातचीत के बारे में पूछे जाने पर कुशवाहा ने उससे बचते हुए कहा कि महागठबंधन नेतृत्व को लेकर समय पर निर्णय लेने में असमर्थ था।

नामांकन दाखिल करने की शुरुआत एक अक्टूबर से होगी। हमें बिहार की बेहतरी के लिए कदम उठाना था। रालोसपा प्रमुख ने दावा किया कि उनके नवगठित मोर्चे में शामिल होने के लिए कई अन्य दलों ने भी रुचि दिखायी है। यह पूछे जाने पर कि क्या वह चिराग पासवान जो राजग में शामिल जदयू से नाराज चल रहे हैं, के नेतृत्व वाले लोजपा का स्वागत करेंगे, कुशवाहा ने कोई टिप्पणी नहीं की।

दिसंबर, 2017 तक प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के अधीन मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री के रूप में कार्य कर चुके कुशवाहा ने कटाक्ष करते हुए आरोप लगाया कि ऐसा लगता है कि भाजपा नीतीश कुमार सरकार को नियंत्रित करने के साथ साथ उसका महागठबंधन में भी दखल है।

उन्होंने मीडिया द्वारा अपने वाल्मीकिनगर लोकसभा सीट उपचुनाव जहां सात नवंबर को मतदान होना है, से चुनाव लडने की अटकलों को खारिज कर दिया। वाल्मीकिनगर लोकसभा सीट पर उपचुनाव जदयू के सांसद बैद्यनाथ महतो के निधन के कारण कराया जा रहा है ।

राष्ट्रीय लोकतांत्रितक समता पार्टी सूत्रों ने कहा कि राजग में शामिल न तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू और न ही भाजपा रालोसपा की राजग में वापसी के विरोधी थे पर लोजपा की संभावनाओं पर अनिश्चितता और भगवा पार्टी का आग्रह था कि बिना सीटों की गारंटी के दबाव के वह गठबंधन में शामिल हो जाएं।

रालोसपा के प्रदेश अध्यक्ष भूदेव चौधरी के पाला बदलकर राजद में सोमवार को शामिल होने के बारे में पूछे जाने पर कुशवाहा ने कहा कि मैंने दूसरे किनारे तक पहुंचने के इरादे से समुद्र में अपनी नाव डाली है पर बीच में छोड़कर जो जाना चाहते हैं तो उनका स्वागत है।

उल्लेखनीय है कि सोमवार को बाहुबली से राजनेता बने और जनअधिकार पार्टी के संस्थापक राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने चंद्रशेखर आज़ाद रावण की भीम आर्मी के साथ वैकल्पिक मोर्चा बनाने की घोषणा की थी।

इससे पूर्व ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिममीन (एआईएमआईएम) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर बिहार के दिग्गज समाजवादी नेता देवेंद्र यादव के साथ मिलकर एक “यूनाइटेड डेमोक्रेटिक सेक्युलर एलायंस” बनाने की घोषणा की थी। (एजेंसी)