Odisha Rath Yatra begins historic Jagannath Rath Yatra in Puri

भुवनेश्वर. ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने मंगलवार को आयोजित भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा को यहां स्थित अपने कार्यालय लोकसेवा भवन में टेलीविजन पर देखा। उच्चतम न्यायालय से सशर्त मंजूरी मिलने के बाद ऐतिहासिक रथयात्रा बिना श्रद्धालुओं के संपन्न हुई।

उल्लेखनीय है कि मार्च में कोरोना वायरस महामारी शुरू होने के बाद से पटनायक अपने घर में ही रह रहे हैं, लेकिन रथयात्रा देखने के लिए वह पहली बार अपने कार्यालय गए। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी वीडियो में पटनायक भगवान जगन्नाथ के रथ ‘नंदिघोष’ की पुरी के बड़ा डांडा (ग्रैंड रोड) पर यात्रा शुरू होने पर ‘‘जय जगन्नाथ” कहते नजर आए।

वीडियो में मुख्यमंत्री को लोकसेवा भवन के अपने कक्ष में हाथ जोड़े भगवान जगन्नाथ से प्रार्थना करते हुए देखा गया। लोगों, श्री जगन्नाथ मंदिर के सेवादारों और प्रशासन को सफलतापूर्वक रथयात्रा संपन्न होने पर धन्यवाद देते हुए पटनायक ने कहा कि ‘ उनकी (भगवान जगन्नाथ) इच्छा के बिना एक पत्ता भी नहीं हिलता।” उल्लेखनीय है कि भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा की दस दिवसीय रथ यात्रा मंगलवार को शुरू हुई।

परंपरा के अनुसार, भगवान नौ दिनों तक अपनी मौसी के यहां गुंडिचा मंदिर में रहते हैं। यह मुख्य मंदिर से करीब तीन किलोमीटर दूर हैं। पारंपरिक रूप से मुख्यमंत्री रथयात्रा के दौरान पुरी जाते हैं और भगवान जगन्नाथ के प्रति श्रद्धा प्रकट करने के लिए नंदिघोष रथ को खींचते हैं। वर्ष 2000 से अबतक कभी ऐसा नहीं हुआ था जब मुख्यमंत्री पटनायक रथ यात्रा में शामिल नहीं हुए हों।

मुख्यमंत्री के अलावा ओडिशा के राज्यपाल, मंत्री, न्यायधीश और अन्य गणमान्य हस्तियां भी रथयात्रा में शामिल होती रही हैं। हालांकि, कोविड-19 की वजह से अन्य अति विशिष्ट गणमान्य व्यक्ति भी इस बार रथ यात्रा में शामिल नहीं हुए। राज्य सरकार ने उच्चतम न्यायालय को भरोसा दिया था कि वह बिना श्रद्धालुओं के इस यात्रा को संपन्न कराएगी।

श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष और पुरी के गजपति महाराज दिव्यसिंह देब ने कहा, ‘‘ इस बार लोग पुरी में मौजूद नहीं हैं, लेकिन उनके पास उत्सव को टेलीविजन पर देखने का मौका है।” रथों को खींचने में शामिल सेवादारों और सुरक्षा कर्मियों की पहले कोविड-19 जांच की गई और रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद ही उन्हें उत्सव में शामिल होने दिया गया। ओडिशा के कानून मंत्री प्रताप जेना, स्कूल एवं जन शिक्षा मंत्री समीर रंजन दास और स्वास्थ्य मंत्री एनके दास को पुरी में रथयात्रा की तैयारियों की निगरानी के लिए भेजा गया था लेकिन वे रथों के खींचने के समारोह में शामिल नहीं हुए।

गजपति महाराज, जिन्हें भगवान जगन्नाथ का प्रथम सेवादार माना जाता है, ने कहा, ‘‘ किसी को यह नहीं सोचना चाहिए कि भगवान जगन्नाथ बड़ा डांडा पर इंतजार कर रहे श्रद्धालुओं को दर्शन देने के लिए आते हैं। वह पूरी दुनिया को दर्शन देने के लिए आते हैं, इसलिए उनका नाम ‘जग-न्नाथ’ हैं।

उन्होंने कहा, भगवान अपना गर्भगृह छोड़कर, सभी जीवों और निर्जीवों को दर्शन के लिए बाहर आते हैं। देब ने कहा कि स्कंद पुराण के मुताबिक, ‘‘भगवान ब्रह्मा और महेश भी रथ यात्रा के दिन भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने आते हैं।” गजपति महाराज ने पांरपरिक रूप से ‘छेरा पहनरा’ (सोने की मूठ वाली झाडू से रथ की सफाई का अनुष्ठान) किया। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने भगवान जगन्नाथ से कोविड-19 महामारी से मानव जाति को बचाने की प्रार्थना की जिसने पूरी दुनिया के लोगों के जीवन और जीविकोपार्जन पर खतरा उत्पन्न कर दिया है।”