IND VS BAN 2nd Test Match : पिंक बॉल को लेकर खिलाड़ियों और दर्शकों के बीच उत्सुकता

कोलकाता, भारतीय टीम और बांग्लादेश के बीच सीरीज का दूसरा टेस्ट मैच आज कोलकाता के ईडन गार्डंस मैदान में खेला जायेगा. आज के मैच में बहुत खुश बातें नई दिखने वाली है. आज का दूसरा और अंतिम

कोलकाता, भारतीय टीम और बांग्लादेश के बीच सीरीज का दूसरा टेस्ट मैच आज कोलकाता के ईडन गार्डंस मैदान में खेला जायेगा. आज के मैच में बहुत खुश बातें नई दिखने वाली है.  आज का  दूसरा और अंतिम टेस्ट मैच होगा. खास बात है की आज देश में पहली बार डे-नाइट फॉर्मेट में खेल खेला जाएगा. साथ ही आज के मैच में खिलाड़ियों को वाइट बॉल की जगह पिंक बॉल का सामना करना पड़ेगा. भारतीय क्रिकेट टीम ही नहीं, बल्कि बांग्लादेश क्रिकेट इतिहास का भी ये पहला डे—नाइट टेस्ट मैच है. यह टेस्ट मैच दिन के 1 बजे से शुरू हो कर रात के 8 बजे तक खेला जाएगा. भारत ने इंदौर में खेले गए पहले टेस्ट मैच में बांग्लादेश को पारी और 130 रनों से हराकर सीरीज में 1-0 की बढ़त बना रखी है.

बीसीसीसाई अध्यक्ष सौरव गांगुली ने पिंक बॉल से मैच खेले जाने का फैसला लिया है.पिंक बॉल से खेले जाने वाले फैसले पर सौरव गांगुली ने कहा की, ‘ये आगे बढ़ने का वक्त है. टेस्ट क्रिकेट में कुछ रोचकता लाना जरुरी था.  ये दुनियाभर में हो रहा है. क्रिकेट को देखें तो भारत एक अहम देश है. कभी न कभी तो इसे शुरू होना ही था.

डे-नाइट टेस्ट में ढलती शाम के समय फ्लट लाइट ऑन हो जाती हैं. उस समय बल्लेबाजों को आने वाली परेशानी को लेकर काफी चर्चा हुई थी. इस ‘ट्विलाइट जोन’ से सामंजस्य बैठाने को लेकर काफी चर्चा हुई है. भारत के कुछ खिलाड़ियों ने इस ट्विलाइट में पिंक बॉल  को देखने में आने वाली समस्या के बारे में बातें कही थीं.   महान क्रिकेटर सचिन तेंडुलकर सहित पूर्व खिलाड़ियों ने कई चुनौतियों की बात की है, जिसमें शाम में खेलने से ओस की समस्या सबसे अहम है. 

दिग्गज क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर का कहना है कि सब कुछ दर्शकों को अधिक संख्या में मैदान में लाने और टेस्ट क्रिकेट को अधिक रोचक बनाने के लिए किया जा रहा है. यह अहम है लेकिन मेरा मानना है कि मैच के बाद आकलन किया जाना चाहिए. कितनी ओस थी और खेल के स्तर से समझौता तो नहीं किया गया.  बॉल  अगर गीली होने लगे और खेल पर उसका असर पड़े तो हमें देखना होगा कि हम क्या करना चाहते हैं. अगर ऐसा नहीं है तो बहुत बढ़िया है.

सीनियर आफ स्पिनर हरभजन सिंह ने कहा की, ईडन गार्डन्स में दूधिया रोशनी में पिंक बॉल  से अंगुली के स्पिनरों की तुलना में कलाई के स्पिनरों की बॉल को समझना अधिक मुश्किल होगा.‘‘अगर आप देखोगे तो कलाई के स्पिनर फायदे की स्थिति में हैं क्योंकि पिंक बॉल  में सीम को देखना (काले धागे के कारण) काफी मुश्किल होता है.” भारत के पास कुलदीप यादव के रूप में कलाई का स्पिनर है लेकिन हरभजन चयन मामलों पर बात नहीं करना चाहते. हरभजन ने कहा, ‘‘यह टीम प्रबंधन का फैसला होगा और मैं टिप्पणी नहीं कर सकता. लेकिन इससे पहले बांग्लादेश को तेज  बॉल बाजी की अनुकूल पिच पर भारतीय  बॉल बाजों का सामना करना होगा.”उन्होंने ने बताया, ‘‘जब अंगुली का स्पिनर  बॉल बाजी करता है तो  बॉल  सीम के साथ रिलीज की जाती है जिससे कि टर्न और उछाल मिले. जब आप गुगली करते हो तो सीम को समझना मुश्किल हो जाता है.”

चेतेश्वर पुजारा ने कहा,यह उत्साहित करने वाला होगा. हमने जो डे-नाइट टेस्ट खेला था तो वो प्रथम श्रेणी मैच था, यह टेस्ट मैच होगा. मुझे पूरा भरोसा है कि सभी खिलाड़ी इसके लिए उत्साहित हैं.’ साथ ही उन्होंने कहा कहा, पिंक बॉल से जितना हम खेलेंगे, उतना ही हमें अनुभव मिलेगा कि  बॉल  को कैसे खेला जाए. हर  बॉल  में अपनी चुनौती होती हैं मुझे नहीं लगता कि लाल  बॉल  की जगह पिंक बॉल  से खेलने में ज्यादा बदलाव करना होगा. कारण यह है कि यह एक ही प्रारूप है. हम पांच दिवसीय मैच ही खेल रहे हैं.’पुजारा के अलावा मौजूदा भारतीय टेस्ट टीम में मयंक अग्रवाल, ऋषभ पंत, कुलदीप यादव, मोहम्मद शमी और ऋद्धिमान साहा को घरेलू स्तर पर पिंक बॉल  से खेलने का अनुभव है. उन्होंने कहा, ‘हमें कोई परेशानी नहीं होगी. ज्यादातर खिलाड़ी दलीप ट्रोफी में खेल चुके हैं और जो नहीं खेले हैं, उनके लिए यह सीखने का अच्छा मौका होगा.’

वहीं, पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज और मौजूदा सांसद गौतम गंभीर ने कहा, ‘कप्तानों को अपने तेज  बॉल बाजों का इस्तेमाल अलग तरीके से करना होगा. लाल  बॉल  से वे उनका इस्तेमाल सुबह जल्दी करते हैं लेकिन दिन-रात्रि मैचों में संभवत: दूधिया रोशनी में भी उनका इस्तेमाल करना होगा क्योंकि एक बजे मैच शुरू होने की तुलना में तब अधिक मदद मिलेगी. कलाई के स्पिनरों की  बॉल  को समझना चुनौती होगी.  क्योंकि अगर आप  बॉल  को हाथ में नहीं भांप पाए तो फिर देर हो जाएगी.’

पूर्व तेज गेंदबाज मदनलाल ने कहा, ‘पिंक बॉल  30-40 ओवर के बाद रिवर्स स्विंग होगी. स्पिनर को विकेट लेने के लिए कुछ ज्यादा जूझना पड़ेगा क्योंकि पिच पर कुछ ज्यादा घास रहने ये  बॉल  कुछ देर से पुरानी होगी. पिंक बॉल पेसर को ज्यादा रास आएगी जबकि स्पिनर को इससे पिच पर ज्यादा टर्न नहीं मिलेगा.’

हालांकि, भारतीय टीम के कप्तान विराट कोहली ने कहा की, डे—नाइट का टेस्ट कभी कभार हो सकता है लेकिन नियमित आधार पर नहीं क्योंकि सुबह लाल  बॉल  का सामना करने की खूबसूरती से मनोरंजन के लिये समझौता नहीं किया जा सकता.  साथ ही विराट कोहली ने कहा है कि इस बॉल से फील्डिंग करना काफी मुश्किल है. पिंक बॉल  की तुलना हॉकी  बॉल  से की है. उन्होंने कहा है कि पिंक बॉल काफी तेजी से फील्डर के हाथ में लगती है. यह बिल्कुल हॉकी के भारी बॉल की तरह है.

भारतीय बल्लेबाजों, खासकर कोहली के लिए काफी चुनौतीपूर्ण होने वाली है, क्योंकि उन्हें अभी तक पिंक बॉल से खेलने का अनुभव नहीं है. इसके अलावा बांग्लादेश के भी किसी खिलाड़ी को पिंक बॉल  से खेलने का अनुभव नहीं है. ऐसे में उनके लिए भी यह मैच काफी चुनौतीपूर्ण होने वाली है.साथी ही आज की मैच में देखना दिलचस्प होगा कि पहले डे नाइट मैच में पिंक बॉल से खेलना खिलाड़ियों के लिए कितना मुश्किल होगा.