देसी शराब बनाकर आजीविका चलाने वाली 13,356 महिलाओं ने  पकड़ी सम्मानजनक आजीविका की राह

    ओमप्रकाश मिश्र 

    रांची. देसी शराब बनाकर अपने परिवार की आजीविका चलाने वाली ग्रामीण महिलाओं को अच्छे कार्यों से जुड़कर सम्मानित जीवन जीने के लिए मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन (Chief Minister Hemant Soren) की पहल पर शुरू किये गए फुलो-झानो आशीर्वाद अभियान महिलाओं के लिए सम्मानजनक आजीविका का वरदान बनता जा रहा है। अभियान (Campaign) का मकसद है राज्य की वैसी महिलाओं को सम्मानजनक आजीविका से जोड़ना,  जो मजबूरीवश देसी दारू निर्माण और बिक्री के कार्य से जुड़ी हैं।

    फुलो–झानो आशीर्वाद अभियान से जुड़ने वाली महिलाएं अब देसी दारू निर्माण और बिक्री का धंधा छोड़कर अच्छे कार्यों से जुड़ने लगी है इस प्रयास के तहत पेट पालने की मज़बूरी में जिस हाट में कोलेबिरा प्रखंड के कोम्बाकेरा गांव की सोमानी देवी पहले देसी दारू बेचती थी और लोगों के बुरे व्यवहार को झेलती थीं, आज उसी हाट-बाज़ार में अपने होटल का संचालन कर रही हैं। सोमानी को अब जलालत भरी जीवन से छुटकारा मिल गया है।

    ब्याजमुक्त कर्ज देकर सम्मानजनक आजीविका अपनाने की राह दिखाई गई

    अच्छे कार्य से जुड़ने वाली सोमानी अकेली महिला नहीं है, बल्कि चलाये गए इस अभियान में अब तक एक वर्ष के भीतर 13,356 ग्रामीण महिलाएं सम्मानजनक आजीविका के सन साधनों से जुड़ चुकी हैं। इस अभियान के तहत राज्य के ग्रामीण इलाकों में सर्वेक्षण कर देसी दारू की बिक्री एवं निर्माण से जुड़ीं करीब 15,456 ग्रामीण महिलाओं को चिह्नित किया गया है। इन्हें मध्यस्तता के माध्यम से समझा बुझाकर पहले सखी मंडल से जोड़ा गया और ब्याजमुक्त कर्ज देकर सम्मानजनक आजीविका अपनाने की राह दिखाई गई। 

    पहले की गई काउंसलिंग

    इस अभियान का क्रियान्वयन झारखण्ड स्टेट लाईवलीहुड प्रमोशन सोसाईटी द्वारा किया जा रहा है। फूलो-झानो आशीर्वाद अभियान के अंतर्गत सबसे पहले देसी दारू की बिक्री से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं का विस्तृत सर्वेक्षण कर उन्हें चिह्नित किया गया, फिर इन महिलाओं को सखी मंडल के दायरे में लाकर उनकी काउंसलिंग की गई है, ताकि वे सम्मानजनक आजीविका से जुड़ सकें। इन महिलाओं को उनकी इच्छानुसार स्थानीय संसाधनों के आधार पर वैकल्पिक आजीविका के साधनों, जैसे कृषि आधारित आजीविका, पशुपालन, वनोपज संग्रहण, मछली पालन, रेशम उत्पादन, मुर्गीपालन, वनोत्पाद से जुड़े कार्य एवं सूक्ष्म उद्यमों आदि से जोड़ा जा रहा है। सखी मंडलों ने इस अभियान के तहत चिह्नित महिलाओं के आजीविका प्रोत्साहन के लिए 10 हज़ार रुपये ऋण राशि का प्रावधान किया है, जो एक साल तक ब्याजमुक्त है। वहीं सामान्य व्यवस्था के तहत चिह्नित महिलाएँ और अधिक ऋण सखी मंडल से ले सकती हैं। इन्हीं चिह्नित महिलाओं में से कुछ दीदियों को सामुदायिक कैडर के रूप में भी चुना गया है, जो दूसरों के लिए मिसाल बनकर देसी -दारू के खिलाफ इस अभियान का नेतृत्व कर रही हैं। जनजागृति फैला रही है।