Birsa Munda granddaughter wrote an open letter to the CM, saying- I am studying by selling vegetables

    ओमप्रकाश मिश्र

    रांची. साहस की स्याही से पुरुषार्थ के पृष्ठों पर शौर्य की गाथा लिखने वाले और बिहार झारखंड की सरजमी पर आजादी का शंखनाद करने वाले स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा की आज 121वीं पुण्यतिथि के अवसर पर मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने आज मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में धरती आबा भगवान बिरसा मुण्डा (Birsa Munda) की तस्वीर पर श्रद्धासुमन अर्पित कर उन्हें नमन किया। इस अवसर पर सीएम हेमन्त सोरेन (CM Hemant Soren) ने कहा कि शोषित और वंचितों के अधिकारों के लिए शोषकों के खिलाफ उलगुलान छेड़ने वाले धरती आबा भगवान बिरसा मुण्डा को नमन करते हुए कहा की हमें उनके बताये राह पर चलने की जरुरत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें गर्व है कि हमारे राज्य को ऐसे वीर महापुरुषों ने मार्गदर्शन किया है। आज हमसभी को देश और समाज के लिए कार्य करने वाले धरती आबा भगवान बिरसा मुण्डा के पद चिन्हों पर चलने की जरुरत है और हमारी सरकार भगवान बिरसा मुण्डा के सपनों का राज्य बनाने के लिए कटिबद्ध है। उन्होंने कहा कि उनके विचार और आदर्शों पर चलकर झारखंड (Jharkhand) को खुशहाल बनाना है।

    हेमन्त सोरेन ने कहा कि शोषित और वंचितों के अधिकार के लिए धरती आबा ने अपना सर्वस्व न्योछावर किया। अंग्रेजों के खिलाफ लोहा लेकर देश को आजाद कराने में धरती आबा ने अपनी महती भूमिका निभाई। भगवान बिरसा मुण्डा के बलिदान को देश कभी नहीं भूलेगा। इनका अदम्य साहस, समर्पण और बलिदान हमसभी देशवासियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि धरती आबा ने समाज में बीमारियों को लेकर फैले अंधविश्वास को भी मिटाने का काम किया था। मौके पर मंत्री सत्यानंद भोक्ता, विधायक दीपिका पांडेय सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव राजीव अरुण एक्का, मुख्यमंत्री के सचिव विनय कुमार चौबे, मुख्यमंत्री के वरीय आप्त सचिव  सुनील श्रीवास्तव,  ने भी धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

    पोते गांव में बिस्किट टॉफी बेचकर अपनी गुजारा कर रहे

    एक ओर मुख्यमंत्री ने जहाँ श्रधासुमन अर्पित कर बिरसा मुंडा के नक़्शे कदम पर चलने की बात कही, वहीं बिरसा मुंडा के वंशज गांव में बिस्किट और सब्जी बेचकर गुजारा कर अपनी जीविका चला रहे हैं। आज बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि पर उनकी परपोती ने झारखंड के मुख्यमंत्री को एक खुला पत्र लिखकर यह जानकारी दी। पत्र में लिखा गया है कि बिरसा मुंडा के पोते सुखराम मुंडा को हर महीने 1000 रूपये वृधा पेंशन मिलता है। शहीद ग्राम विकास योजना की शुरआत उनके गांव से हुई पर उन लोगों को अब तक इसका लाभ नहीं मिल सका। बिरसा मुंडा की परपोती अपने पिता द्वारा उगाई गई सब्जी बाजार में बेचकर अपने  पार्ट थर्ड की पढ़ाई पूरी कर रही है। वह खूंटी जिले के बिरसा कॉलेज में ग्रेजुशन की पढ़ाई कर रही है। उनके 82 वर्षीय पोते गांव में बिस्किट टॉफी बेचकर अपनी गुजारा कर रहे है। परपोते कानू मुंडा पोस्ट ग्रेजुएट हैं उन्हें खूंटी जिला स्थित सदर अनुमंडलाधिकारी के दफ्तर में चपरासी की नौकरी कर गुजारा करना पड़ रहा है। देश की आजादी में अपने प्राण विसर्ग करने वाले हुतात्मा के वंशजों की ये कहानी सरकार की जागरूकता और देश के स्वंत्रता सेनानियों के प्रति सम्मान और उनके अधिकार पर एक सवालिया निशान है। 

    सीएम के नाम खुला पत्र…

    आदरणीय मुख्यमंत्री जी, झारखंड, मैं जौनी कुमारी मुंडा। भगवान बिरसा मुंडा की वंशज। मैं अभी बिरसा कॉलेज खूंटी में बीए पार्ट-3 की छात्रा हूं। जब शिक्षक बिरसा के आंदोलन के बारे में पढ़ाते हैं, तो गर्व होता है। लेकिन, मैं किसी को नहीं बताती कि मैं भगवान बिरसा की पड़पोती हूं। क्योंकि लोग हमारी स्थिति देखकर निराश हो जाएंगे। सुनती हूं कि आदिवासी छात्राओं को पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति का लाभ मिलता है। मैंने कई बार आवेदन दिए, लेकिन कभी नहीं मिली। मेरे पिता सुखराम मुंडा 82 की उम्र में भी खेतों पर मेहनत करते हैं। 1,000 रुपए वृद्धावस्था पेंशन मिलती है, उसी से मेरी पढ़ाई का खर्च चलता है। भगवान बिरसा ‘अबुआ दिशुम अबुआ राज’ की बात करते थे। आज झारखंड में अबुआ राज है, लेकिन हमारी स्थिति थोड़ी भी नहीं सुधरी। मैं सरकार से कुछ नहीं मांगती। अलग से कुछ नहीं चाहिए, लेकिन जो नियम जनजातियों के लिए बने हैं, जो योजनाएं गरीबों के लिए हैं, उनका लाभ तो मिले। मैं अपने लिए, अपने बाबा, अपनी मां के लिए सम्मान चाहती हूं। बस इतना ही।