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निर्देशक, कोरियोग्राफर और अभिनेता गुरु दत्त को भारत का ऑर्सन वेल्स कहा जाता है। उनका असली नाम वसंत कुमार शिवशंकर पादुकोण था। गुरु दत्त ने साल 1944 में फिल्म चांद में एक छोटी से भूमिका निभाकर अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी।
निर्देशक, कोरियोग्राफर और अभिनेता गुरु दत्त को भारत का ऑर्सन वेल्स कहा जाता है। उनका असली नाम वसंत कुमार शिवशंकर पादुकोण था। गुरु दत्त ने साल 1944 में फिल्म चांद में एक छोटी से भूमिका निभाकर अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी।
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गुरु दत्त और गीता रॉय 1953 में विवाह बंधन में बंध गए। दोनों की जिंदगी काफी खुशनुमा चल रही थी। अचानक ही 'प्यासा' बनने के दौरान गीता और उनके बीच दूरियां आनी शुरू हो गईं।
गुरु दत्त और गीता रॉय 1953 में विवाह बंधन में बंध गए। दोनों की जिंदगी काफी खुशनुमा चल रही थी। अचानक ही 'प्यासा' बनने के दौरान गीता और उनके बीच दूरियां आनी शुरू हो गईं।
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हीरोइन वहीदा रहमान से बढ़ती नजदीकियां ने दोनों के बीच शक इस हद तक बढ़ गया कि एक दिन गुरु दत्त को एक चिट्ठी मिली। उसमें लिखा गया था कि, 'मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती। अगर तुम मुझे चाहते हो तो आज शाम को साढ़े छह बजे मुझसे मिलने नारीमन प्वॉइंट पर आओ। तुम्हारी वहीदा।'
हीरोइन वहीदा रहमान से बढ़ती नजदीकियां ने दोनों के बीच शक इस हद तक बढ़ गया कि एक दिन गुरु दत्त को एक चिट्ठी मिली। उसमें लिखा गया था कि, 'मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती। अगर तुम मुझे चाहते हो तो आज शाम को साढ़े छह बजे मुझसे मिलने नारीमन प्वॉइंट पर आओ। तुम्हारी वहीदा।'
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9 अक्तूबर को उनके दोस्त अबरार अलवी उनसे मिलने गए तो गुरु दत्त शराब पी रहे थे। इस बीच उनकी गीता दत्त से फोन पर लड़ाई हो चुकी थी। वो अपनी ढाई साल की बेटी से मिलना चाह रहे थे और गीता उसे उनके पास भेजने के लिए तैयार नहीं थीं।
9 अक्तूबर को उनके दोस्त अबरार अलवी उनसे मिलने गए तो गुरु दत्त शराब पी रहे थे। इस बीच उनकी गीता दत्त से फोन पर लड़ाई हो चुकी थी। वो अपनी ढाई साल की बेटी से मिलना चाह रहे थे और गीता उसे उनके पास भेजने के लिए तैयार नहीं थीं।
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गुरु दत्त ने नशे की हालत में ही उन्हें अल्टीमेटम दिया, 'बेटी को भेजो वरना तुम मेरा मरा हुआ शरीर देखोगी।' एक बजे रात को दोनों ने खाना खाया और फिर अबरार अपने घर चले गए। अगले दिन दोपहर में उनके पास फोन आया कि गुरु दत्त की तबीयत खराब है।
गुरु दत्त ने नशे की हालत में ही उन्हें अल्टीमेटम दिया, 'बेटी को भेजो वरना तुम मेरा मरा हुआ शरीर देखोगी।' एक बजे रात को दोनों ने खाना खाया और फिर अबरार अपने घर चले गए। अगले दिन दोपहर में उनके पास फोन आया कि गुरु दत्त की तबीयत खराब है।
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जब वो उनके घर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि गुरु दत्त कुर्ता-पायजामा पहने पलंग पर लेटे हुए थे। पलंग की बगल की मेज पर एक गिलास रखा हुआ था जिसमें एक गुलाबी तरल पदार्थ अभी भी थोड़ा बचा हुआ था।
जब वो उनके घर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि गुरु दत्त कुर्ता-पायजामा पहने पलंग पर लेटे हुए थे। पलंग की बगल की मेज पर एक गिलास रखा हुआ था जिसमें एक गुलाबी तरल पदार्थ अभी भी थोड़ा बचा हुआ था।